मलाला की अफगान तालिबान के खिलाफ एक्शन की अपील

Updated on 13-01-2025 05:13 PM

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने रविवार पाकिस्तान में मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर आयोजित एक सम्मेलन में भाग लिया। CNN के मुताबिक इस दौरान उन्होंने मुस्लिम नेताओं से लैंगिक भेदभाव को इंटरनेशनल कानून के तहत अपराध बनाने की अपील की। इसके साथ ही मलाला ने अफगान महिलाओं के हालात के लिए तालिबान की निंदा की।

मलाला ने कहा कि मुस्लिम नेताओं को तालिबान की नीतियों के खिलाफ आगे आना चाहिए। उन्होंने लड़कियों को स्कूल और यूनिवर्सिटी जाने से रोक दिया है। तालिबान के दमनकारी कानूनों को खुले तौर पर चुनौती देते हुए उनकी निंदा की जानी चाहिए।

इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और मुस्लिम वर्ल्ड लीग द्वारा आयोजित इस शिखर सम्मेलन में मुस्लिम देशों के दर्जनों मंत्री और एक्सपर्ट्स शामिल हुए। इस समिट का आयोजन पाकिस्तान में किया गया।

तालिबान महिलाओं को इंसान के तौर पर नहीं देखता

मलाला ने कहा कि साफ तौर पर कहें तो अफगानिस्तान में तालिबान महिलाओं को इंसान के रूप में नहीं देखता है। उसकी नीतियों में कुछ भी इस्लामी नहीं है। तालिबान उन महिलाओं और लड़कियों को सजा देता है तो जो उनके कानून को तोड़ने की हिम्मत दिखाती है।

तालिबान अपने अपराधों को मजहब के पीछे छुपाता है, लेकिन हकीकत में उसकी नीतियां हमारी आस्था के एकदम उलट है। उन्होंने अफगानिस्तान में लैंगिक रंगभेद की व्यवस्था बना दी है।

तालिबान ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया

अफगान तालिबान ने मलाला के बयान पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि तालिबान पहले कहा था कि वो अफगान संस्कृति और इस्लामी कानून के हिसाब से महिलाओं को सम्मान और अधिकार देते हैं। तालिबान हुकूमत का दावा है कि इस्लामी कानून अफगान पुरुषों और महिलाओं के अधिकारों की गारंटी देता है।

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार आने के बाद से महिलाओं पर लगातार कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। जिनमें लड़कियों के स्कूल जाने, सार्वजनिक रूप से बोलने और चेहरा दिखाने और खेलों में भाग लेने पर बैन शामिल है।

मलाला को सिर में मारी गई थी गोली

मलाला का जन्म 1997 में पाकिस्तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वा प्रांत की स्वात घाटी में हुआ। साल 2009 में मलाला ने अपने असली नाम को छिपाकर 'गुल मकई' के नाम से बीबीसी के लिए एक डायरी लिखना शुरू की। इसमें उन्होंने स्वात में तालिबान के बुरे कामों का जिक्र किया।

बीबीसी के लिए डायरी लिखते हुए मलाला पहली बार दुनिया की नजर में तब आईं, जब दिसंबर 2009 में मलाला के पिता जियाउद्दीन ने अपनी बेटी की पहचान सार्वजनिक की। जनवरी 2020 में गुल मकई के नाम से मलाला पर आधारित फिल्म भी रिलीज हुई।

2012 में पाकिस्तानी तालिबान के आतंकियों ने मलाला को सिर में गोली मारी थी। मलाला ने अपने साथ हुई इस घटना के बाद एक मीडिया संस्था के लिए ब्लॉग लिखना शुरू किया। उनकी बहादुरी के लिए संयुक्त राष्ट्र ने मलाला के 16वें जन्मदिन पर 12 जुलाई को मलाला दिवस घोषित किया था।

मलाला को साल 2013 में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। उन्हें 2014 में भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार दिया गया।



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