
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शिक्षाविदों ने बजट में विशेष प्रविधान की मांग की है। शिक्षाविद डीएस राय का कहना है कि सरकारी स्कूलों के भवनों के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं पर बजट खर्च होना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि बजट बढ़ तो रहा है, लेकिन उसका सही उपयोग और उनसे क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में इस बार तकनीक और मानव संसाधन के बीच संतुलन बनाने की मांग सबसे प्रबल है। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि बजट का मुख्य स्तंभ स्वास्थ्य होना चाहिए। कैंसर और हृदय रोग जैसी बीमारियों की शुरुआती पहचान के लिए एआइ स्टार्टअप्स को विशेष अनुदान दिया जाना चाहिए। पूर्व सिविल सर्जन डॉ. इंद्र कुमार चुघ ने एक गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि नए अस्पतालों में इमारतें तो बन गई हैं, लेकिन वहां स्टाफ की कमी है।
उन्होंने मांग की है कि डॉक्टरों और स्टाफ के लिए अस्पताल परिसर में ही स्टाफ क्वार्टर बनाए जाएं। चिकित्सा बजट को जीडीपी के छह प्रतिशत से अधिक किया जाए। कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस की सीमा 35 लाख रुपये तक बढ़ाई जाए।
मध्य प्रदेश को 'वाइल्ड लाइफ कैपिटल' के रूप में पहचान दिलाने वाले विशेषज्ञों ने पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की वकालत की है। पर्यटन विशेषज्ञ सुरेश पटवा का कहना है कि प्रदेश में 70 प्रतिशत जंगल होने के बावजूद बजट में वन्य जीव पर्यटन के लिए विशेष प्रविधान नहीं हैं।
जबकि वन्य जीवों को देखने के लिए यहां पर्यटक दुनिया भर से आते हैं। राष्ट्रीय अभयारण्यों पर बड़े होटल चेन की कोई इकाई भी नहीं है। मध्य प्रदेश पर्यटन टूरिस्ट बसों का संचालन कर सकता है, जो टूर पैकेज में पर्यटकों को यात्राएं करा सकती हैं, लेकिन कोई पैकेज नहीं उपलब्ध नहीं है।