दिवाली और फेस्टिव सीजन की शुरुआत के साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बंपर सेल और डिस्काउंट ऑफर्स मिलते हैं। लेकिन ऑफर के साथ-साथ साइबर अपराधियों भी सक्रिय हो जाते हैं। भारतीय खरीदार जब ऑफर्स का फायदा उठाने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग, मैसेजिंग और बैंकिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे होते हैं, तब स्कैमर्स उन्हें ठगने के नए-नए और बेहद चालाक तरीके अपनाते हैं। साइबर-सुरक्षा और एंटीवायरस सॉफ्टवेयर कंपनी Kaspersky (कैसपर्सकी) ने NBT Tech को बताया त्योहारी सीजन में किस तरह हैकर्स लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। साथ ही, स्कैम्स से बचने का तरीका भी बताया है। आइये, जानते हैं।
फेस्टिव सीजन में इस तरह स्कैमर्स बना रहे निशाना
कैस्पर्सकी के अनुसार, स्कैमर्स हमेशा वहीं अपना जाल बिछाते हैं, जहां खरीदार सबसे ज्यादा समय तक रहते हैं। जनवरी से अक्टूबर, 2025 के बीच ऑनलाइन स्टोर्स, बैंकों और पेमेंट सिस्टम्स के तौर पर लोगों के साथ ठगी करने वाले 6.4 मिलियन (64 लाख) से अधिक फिशिंग प्रयासों को ब्लॉक किया गया, जिनमें से लगभग आधे सीधे तौर पर ऑनलाइन खरीदारों को निशाना बना रहे थे। यानी 64 लाख लोगों को बचा लिया गया, लेकिन खतरा अभी टला नहीं।
अब बदल रहे तरीके
अब ये ऑनलाइन स्कैम इतने असली जैसे दिखने लगे हैं कि इन्हें पहचानना मुश्किल हो गया है। नकली वेबसाइट्स अब असली ब्रांड्स जैसी ही नकल बना लेती हैं। हाल ही में ऐसी नकली iPhone Duo वेबसाइट्स देखी गईं, जहां लोगों को फंसाने के लिए 25% डिस्काउंट, काउंटडाउन टाइमर और व्हाट्सऐप पर बात करने का ऑफर दिया जा रहा था। इतना ही नहीं, ये ठग भारत में त्योहारों और बड़े मौकों का पूरा फायदा उठाते हैं। जैसे 2025 में महाकुंभ के नाम पर नकली सामान बेचने वाली कई फर्जी वेबसाइट्स सामने आई थीं, जहां लोगों ने पैसे तो दे दिए लेकिन सामान कभी नहीं मिला। दिवाली और फेस्टिव सेल्स में भी यही सब चल रहा है।
असली दिखने वाली नकली वेबसाइट्स
कई स्कैमर्स बड़ी कंपनियों और बड़ी दुकानों के नाम का इस्तेमाल करते हैं।
वे लोगों को सेल शुरू होने से पहले ही खास डिस्काउंट देने का लालच देकर नकली और फर्जी वेबसाइट्स पर ले जाते हैं।
इसके बाद ये नकली वेबसाइट्स यूजर्स की पर्सनल और पेमेंट संबंधी जानकारी चुराती हैं। कुछ वेबसाइट्स शुरुआत में केवल नाम, पता और कॉन्टैक्ट डिटेल मांगती हैं और दावा करती हैं कि कोई मैनेजर बाद में कॉल करेगा, जो आगे चलकर बड़े वित्तीय फ्रॉड बनता है।
फिर डिलीवरी के नकली मैसेज इस ट्रैप को पूरा करते हैं। मिस हुए पार्सल या कम राशि की री-डिलीवरी फीस से जुड़े मैसेज यूजर्स को कार्ड डिटेल्स, पासवर्ड या ओटीपी शेयर करने के लिए मजबूर करते हैं।
खुद को कैसे रखें सुरक्षित?
कैस्पर्सकी ने यूजर्स को सलाह दी है कि केवल आधिकारिक ऐप्स और विश्वसनीय वेबसाइटों से ही खरीदारी करें और कोई भी डिटेल देने से पहले वेब एड्रेस की अच्छी तरह जांच करें।
अनरियल डिस्काउंट और काउंटडाउन टाइमर्स को खतरे की घंटी समझें।
संदिग्ध मैसेज में दिए गए लिंक्स पर कभी क्लिक ना करें।
ऑर्डर और डिलीवरी का स्टेटस हमेशा रिटेलर या कूरियर कंपनी के आधिकारिक ऐप में जाकर ही चेक करें।
कभी भी री-डिलीवरी फीस ना दें और ना ही अपना ओटीपी या पासवर्ड शेयर करें।
हमेशा याद रखें कि पैसे पाने के लिए आपको कभी भी अपना UPI PIN देने की जरूरत नहीं होती।
ऑनलाइन खरीदारी के लिए वर्चुअल कार्ड उपयोग करें और अपने बैंक स्टेटमेंट्स को समय-समय पर जांच करते रहें।