रूस बोला- भारत के चुनाव में रुकावट डाल रहा अमेरिका:कहा- भारत को लेकर उनकी समझ कमजोर

Updated on 09-05-2024 01:28 PM

रूस ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह भारत के लोकसभा चुनाव में रुकावट डालने की कोशिश कर रहा है। रूस ने कहा है कि अमेरिका भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी कर रहा है।

दरअसल, रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा से बुधवार को पन्नू मामले में अमेरिका के भारत पर लगाए आरोपों पर सवाल पूछा गया। इस पर जखारोवा ने कहा, "अमेरिका बेबुनियाद आरोप लगाकर भारत का अपमान कर रहा है।"

अमेरिका ने भारत के खिलाफ पेश नहीं किया कोई सबूत
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा, "अमेरिका ने अभी तक ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो सके कि भारत पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल था। इसके अलावा धार्मिक आजादी के उल्लंघन के आरोप भी भारत को लेकर अमेरिका की कमजोर समझ को दिखाते है।"

रूस ने कहा, "अमेरिका ऐसे आरोप लगाकर एक संप्रभु देश के तौर पर भारत का अपमान कर रहा है। अमेरिका भारत ही नहीं कई और देशों के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के बेबुनियाद आरोप लगाता रहा है। उनकी कार्रवाई स्पष्ट रूप से भारत के आंतरिक मामलों में दखल का सबूत है।"

अमेरिका इससे पहले रूस पर भी निष्पक्ष चुनाव न कराने का आरोप लगा चुका है। दरअसल, रूस में 15-17 मार्च के बीच आम चुनाव हुए थे। इसमें पुतिन 88% वोटों के साथ 5वीं बार रूस के राष्ट्रपति बने। इस पर अमेरिका ने आरोप लगाया था कि पुतिन देश में किसी भी विरोधी नेता को टिकने नहीं देते हैं। रूस में निष्पक्ष चुनाव नहीं होते हैं।

अमेरिका-रूस के बीच क्या है चुनाव में दखल के आरोपों की राजनीति
अमेरिका और पश्चिमी देश रूस और चीन पर उनके चुनावों में दखलंदाजी के आरोप लगाते आए हैं। 2021 में अमेरिका की एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पुतिन ने डोनाल्ड ट्रम्प को फायदा पहुंचाने के लिए अमेरिकी चुनाव में दखल देने के ऑपरेशन को मंजूरी दी थी। इससे पहले 2016 के अमेरिकी चुनाव में भी रूस पर हस्तक्षेप के आरोप लगे थे।

इस पर बाइडेन ने पुतिन को हत्यारा बताते हुए कहा था कि उन्होंने जितने भी गलत काम किए हैं, सभी का पर्दाफाश जल्द होगा। इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिका के बयान से नाराज होकर रूस ने वहां से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था।

इसके अलावा अमेरिका चीन पर भी चुनावों में दखल देने का आरोप लगा चुका है। हाल ही में चीन के दौरे पर गए अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले आश्वासन के बावजूद अमेरिकी चुनाव में चीन के दखल के सबूत मिले हैं।

अमेरिका ने कुछ हफ्तों पहले ही एक कानूनी पास किया गया था। इसमें कहा गया था कि अगर चीन की कंपनी ने टिकटॉक को नहीं बेचा तो ऐप को US में बैन कर दिया जाएगा। यह कदम अमेरिकी चुनाव में चीन के दखल को रोकने के लिए उठाया गया था।

इन सबके बीच भारत के चुनाव में अमेरिका की दखलंदाजी का आरोप लगाकर रूस पश्चिमी देशों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, भारत में लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अमेरिका की तरफ से भारत में धार्मिक आजादी और भेदभाव को लेकर रिपोर्ट जारी की गई थी। वहीं दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर भी अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने सवाल खड़े किए थे।

पन्नू मामले में भारत पर क्या आरोप लगे?
अमेरिका ने पिछले साल नवंबर में भारत पर न्यूयॉर्क में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था। हालांकि अमेरिका ने इस साजिश को नाकाम कर दिया गया था। इसके बाद 29 नवंबर को इस मामले में न्यूयॉर्क पुलिस की चार्जशीट सामने आई थी।

इसमें भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता का नाम था। चार्जशीट में लिखा था- PM मोदी के अमेरिकी दौरे के वक्त पन्नू को मारने की कोशिश की गई। इसकी प्लानिंग भारत के पूर्व CRPF अफसर ने की। रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिका लगातार भारत से मामले की जांच में सहयोग की अपील कर चुका है। वहीं भारत ने अमेरिका के आरोपों को बेतुका बताया है।

हाल ही में अमेरिका मीडिया हाउस वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में भारतीय जांच एजेंसी RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) का हाथ था। रिपोर्ट के मुताबिक पन्नू की हत्या की पूरी प्लानिंग RAW के एक सीनियर अधिकारी विक्रम यादव ने की थी। भारत ने इस रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया था।



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