
भोपाल। शहर में हरित क्षेत्रों, जलाशयों के आसपास अवैध रूप से कचरा फेंकने और जलाने के साथ ही पुराने कचरे के निपटारे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने इसे पर्यावरण संतुलन और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए भोपाल नगर निगम की कड़ी आलोचना की है।नितिन सक्सेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने कहा कि कालियासोत डैम के ग्रीन बेल्ट को डंपिंग साइट में बदल दिया गया है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और लोगों की सेहत प्रभावित हो रही है। ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन में लगातार लापरवाही सामने आ रही है।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण अनुच्छेद-21 के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार है। राज्य सरकार और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वे पर्यावरण की रक्षा करें। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया गया।
एनजीटी ने भोपाल कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को आदमपुर खंती सहित अन्य स्थलों पर पड़े पुराने कचरे के निपटान की कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आदमपुर खंती के पुराने कचरे व एनटीपीसी के साथ प्रस्तावित चारकोल प्लांट की स्थिति पर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।
साथ ही इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा को भी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है। आदेश में कहा गया है कि नियमों का पालन नहीं होने पर स्थानीय निकायों पर प्रति माह एक लाख से 10 लाख रुपए तक का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय निकाय जुर्माना भरने में असमर्थ रहते हैं, तो यह राशि राज्य सरकार को देनी होगी। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) में प्रतिकूल प्रविष्टि (एडवर्स एंट्री) करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे उनका प्रमोशन और करियर प्रभावित होगा।
एनजीटी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करते हुए क्षति की भरपाई कराई जाए और पर्यावरण बहाली के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। नगर निगम में पर्यावरण सेल गठित कर प्रशिक्षित अधिकारियों की नियुक्ति भी अनिवार्य की गई है।
ट्रिब्यूनल ने कचरा पृथक्करण, रिसाइकलिंग, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और कम्पोस्टिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। साथ ही निर्माताओं और ब्रांड कंपनियों को पैकेजिंग कचरे के निपटान में आर्थिक सहयोग देने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी। तब तक सभी संबंधित विभागों को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।