36 मौतों वाले भागीरथपुरा कांड में जांच रिपोर्ट:टेंडर में देरी, इंजीनियरिंग से मॉनिटरिंग तक लापरवाही; एक्सपर्ट बोले-दोष साबित होने पर कठोर सजा

Updated on 06-10-2026 01:17 PM

इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की एक सदस्यीय जांच आयोग की अंतिम रिपोर्ट ने घटना को किसी एक अधिकारी की गलती नहीं, बल्कि सालों से चली आ रही तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाहियों का परिणाम माना है। रिपोर्ट में इंजीनियरिंग, पाइप लाइन मेंटेनेंस, मॉनिटरिंग और टेंडर प्रक्रिया के अलग-अलग स्तरों पर जिम्मेदारी सामने आई है।

रिपोर्ट के आधार पर लीगल एक्सपर्टस का मानना है कि जिन अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही जांच में सामने आई है, उनके खिलाफ अब केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। इनमें कठोर धाराओं में केस दर्ज होने के बाद कड़ी सजा का प्रावधान है।

आयोग ने सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव कुमार श्रीवास्तव की भूमिका पर विशेष टिप्पणी की है। वे 2013 से 2026 तक संबंधित व्यवस्था में पदस्थ रहे।

आयोग के अनुसार, पाइपलाइनों की नियमित जांच, लीकेज की पहचान, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस और समय पर क्षतिग्रस्त पाइपलाइन बदलना उनकी जिम्मेदारी थी।

रिपोर्ट में इन स्तरों पर कमी के साथ पाइपलाइन रिप्लेसमेंट की प्रक्रिया में करीब 600 दिन की देरी का उल्लेख है। टेंडर प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को मिलाकर आयोग ने 859 दिन से अधिक की असामान्य देरी भी दर्ज की है।

टेंडर शाखा के ये दो कर्मचारी जिम्मेदार

आयोग ने प्राग्य तिवारी, असिस्टेंट ग्रेड-III और नीति चौरसिया खरे, सब-इंजीनियर को टेंडर शाखा से जुड़े कार्यों में हुई देरी के लिए जिम्मेदार माना है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां फाइल उच्च अधिकारियों के स्तर पर लंबित रही, वहां उनकी भूमिका भी अलग से देखी जानी चाहिए।

  • रोहित सिसोनिया: कुछ टेंडर चरणों में समय लगा, लेकिन वित्तीय बोली की मंजूरी में दो दिन की अवधि को आयोग ने महत्वपूर्ण देरी नहीं माना।
  • आशीष पाठक: LOA मंजूरी में चार दिन की अवधि को आयोग ने सामान्य प्रशासनिक समय माना।
  • निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव: आयोग ने घटना और टेंडर देरी की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी से मुक्त किया।

लीकेज से लेकर दूषित पानी तक की जानकारी थी, फिर भी नहीं रुकी लापरवाही

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों को पाइपलाइन में लीकेज, बदबू और पानी में बैक्टीरिया की मौजूदगी की जानकारी थी। इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

रिपोर्ट में तत्कालीन अपर कमिश्नर भव्या मित्तल और रोहित सिसोनिया, प्रभारी असिस्टेंट इंजीनियर सरोज कुमार प्रजापति, सब इंजीनियर शुभम श्रीवास्तव, असिस्टेंट इंजीनियर योगेश जोशी तथा टेंडर शाखा की प्रज्ञा तिवारी और नीति चौरसिया की भूमिका को जिम्मेदारी के दायरे में रखा गया है।

2019 की चेतावनी पर भी उठे सवाल

रिपोर्ट में 2019 की मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पानी जांच रिपोर्ट को भी अहम माना गया है। कई नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले थे।

पुराना इंजीनियरिंग सिस्टम : सीवरेज के पानी की पहुंच पेयजल लाइन तक

आयोग ने 1990-95 के दौरान बिछाए गए सीवरेज नेटवर्क और 1999-2004 के बीच बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन व्यवस्था को भी घटना की महत्वपूर्ण कड़ी माना है।

कई स्थानों पर दोनों लाइनें निर्धारित तकनीकी मानकों के विपरीत एक-दूसरे के करीब या क्रॉसिंग में मिलीं। इससे सीवरेज का पानी पेयजल लाइन में पहुंचने का खतरा बना रहा।

दोष सिद्ध होने पर 10 साल से उम्र कैद तक की सजा

सीनियर एडवोकेट मनीष यादव ने कहा कि जांच रिपोर्ट में जिन अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है, उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच और पूछताछ होनी चाहिए। उनके मुताबिक, इतने गंभीर मामले में केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी।

एडवोकेट यादव के मुताबिक, जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर BNS की धारा 105 और 106 के तहत आपराधिक जिम्मेदारी की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि कौन-सी धारा लागू होगी और किस पर कौन-सा आरोप बनता है, यह जांच और कानूनी प्रक्रिया में तय होगा। इन दोनों धाराओं में दोष सिद्ध होने पर 10 साल से उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है।

जिन्हें रिपोर्ट में आरोपी नहीं माना, उनकी भूमिका भी जांचे जाने की मांग

एडवोकेट यादव का यह भी कहना कि आयोग की रिपोर्ट को कार्रवाई की अंतिम सीमा नहीं माना जाना चाहिए। जिन लोगों की भूमिका जांच में सामने नहीं आई या जिन्हें रिपोर्ट में जिम्मेदारी से मुक्त किया गया है, यदि आगे के तथ्यों में उनकी भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी जांच और एफआईआर की जानी चाहिए।

उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों समेत अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए, यदि उनके स्तर पर कोई चूक सामने आती है। उनका तर्क है कि 36 लोगों की मौत जैसे गंभीर मामले में केवल उन नामों तक कार्रवाई सीमित नहीं होनी चाहिए, जो रिपोर्ट में दर्ज हैं।

मुआवजा बढ़ाने की भी मांग

एडवोकेट यादव ने मृतकों के परिजन को दिए गए 2 लाख रुपए के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर 4 से 20 लाख रुपए तक किए जाने की मांग का समर्थन किया। हादसे में बीमार हुए लोगों के मुआवजे में भी बढ़ोतरी की जरूरत बताई।

एक व्यक्ति नहीं, पूरी व्यवस्था पर सवाल

रिपोर्ट का मूल निष्कर्ष यही है कि दूषित पानी की त्रासदी अचानक हुई एक चूक का परिणाम नहीं थी। गलत या असुरक्षित पाइपलाइन व्यवस्था, वर्षों तक प्रभावी मेंटेनेंस और मॉनिटरिंग का अभाव तथा क्षतिग्रस्त पाइपलाइन बदलने में हुई लंबी देरी ने मिलकर हालात पैदा किए।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब रिपोर्ट में सामने आई जिम्मेदारियों के आधार पर एफआईआर, जांच और अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़नी चाहिए, ताकि यह तय हो सके कि लापरवाही के लिए कानूनी रूप से कौन-कौन जवाबदेह है।

लोगों ने कहा- पार्षद, मेयर और विधायक जिम्मेदार

‘दैनिक भास्कर’ ने भागीरथपुरा क्षेत्र के वर्तमान हालात जाने तो रहवासियों में अब भी आक्रोश है। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट में जिम्मेदार पार्षद कमल वाघेला, मेयर पुष्यमित्र भार्गव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार नहीं माना गया है।

हादसे में रहवासी सोनाली कदम की सास शकुनबाई की मौत हो गई थी, लेकिन परिवार को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। परिजन जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए था, उन्हें रिपोर्ट में जिम्मेदार नहीं माना गया। रहवासियों ने क्षेत्रीय पार्षद, मेयर और अन्य संबंधित जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

रहवासी सतीश वर्मा ने बताया कि हादसे में उनकी पत्नी सुनीता की मौत हो गई थी, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। उनका कहना है कि आठ महीने से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने हादसे और पत्नी की मौत के लिए क्षेत्रीय पार्षद, मेयर और विधायक को जिम्मेदार ठहराया है।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 06 October 2026
इंटरनेट मीडिया पर बोटोक्स को लेकर तरह-तरह के दावे वायरल हो रहे हैं। कहीं इसे लकवे का इलाज बताया जा रहा है तो कहीं कुछ घंटे या दो दिन में…
 06 October 2026
उज्जैन के रामवास क्षेत्र में मंगलवार को मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा की एक बस में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में…
 06 October 2026
मध्य प्रदेश के ऊपर हिस्से में साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) की एक्टिविटी है। इस वजह से जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में अगले 4 दिन बारिश होने का अनुमान है। इंदौर…
 06 October 2026
मंत्री विजय शाह का भाषण हुआ म्यूटमाइक तो ठीक था, लेकिन मंत्री जी को ही म्यूट कर दिया गया। लाइव प्रसारण के दौरान मंत्री विजय शाह के भाषण की आवाज…
 06 October 2026
इंदौर में बंगाली चौराहा से पीपल्याहाना के बीच RE-2 (रोड) के करीब एक किलोमीटर लंबे अधूरे हिस्से का काम पूरा कराने के लिए मंगलवार सुबह करीब 11 बजे नगर निगम…
 05 October 2026
इंदौर के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में सरकारी लोन दिलाने के नाम पर एक सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर के साथ लाखों रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपी ने पीड़ित…
 05 October 2026
11 अक्टूबर को इंदौर के होलकर स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले टी-20 मुकाबले की तैयारियां अब आधुनिक तकनीक के साथ की जा रही हैं। मैदान में…
 05 October 2026
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रविवार शाम 20 रुपए के 7 मोमोज देने पर विवाद हो गया। ठेले वाले ने 18 साल के छात्र पर कढ़ाई का खौलता तेल फेंक…
 05 October 2026
ग्वालियर पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं को जाल में फंसाने वाले युवक को पकड़ा है। उसके मोबाइल से 50 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं। इनमें MP और…
Advt.