संयुक्त राष्ट्र में भारत ने किया फिलिस्तीन का समर्थन, सदस्यता के पक्ष में किया मतदान, विरोध में आए 9 देश

Updated on 11-05-2024 12:47 PM
संयुक्त राष्ट्र: फिलिस्तीन की सदस्यता को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारी समर्थन मिला। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारी बहुमत के साथ फिलिस्तीन की पूर्ण सदस्यता का समर्थन किया है। भारत ने शुक्रवार को UNGA के प्रस्ताव के मसौदे के पक्ष में मतदान किया। ड्राफ्ट में कहा गया था कि फिलिस्तीन योग्य है और पूर्ण सदस्य देश के रूप में उसे शामिल किया जाना चाहिए। इसमें सिफारिश की गई कि सुरक्षा परिषद इस मामले पर एक बार फिर विचार करे। सुरक्षा परिषद में आए ऐसे ही एक प्रस्ताव पर अमेरिका ने वीटो किया था। अमेरिका और इजरायल ने UNGA में आए प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया।

193 सदस्यों वाले महासभा में सुबह विशेष इमरजेंसी सत्र की बैठक बुलाई गई। यूएन में फिलिस्तीन की पूर्ण सदस्यता के समर्थन में अरब समूह का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में पेश किया गया। यूएई मई में अरब समूह का अध्यक्ष है, जिसने इस प्रस्ताव को पेश किया। प्रस्ताव के पक्ष में भारत के साथ-साथ 143 देशों ने मतदान किया। प्रस्ताव के खिलाफ 9 वोट डाले गए। वहीं 25 देश वोटिंग में शामिल नहीं हुए। वोटिंग के बाद संयुक्त राष्ट्र तालियों से गूंज उठा।

सुरक्षा परिषद फिर करे विचार

रिजोल्यूशन ने निर्धारित किया कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुच्छेद 4 के मुताबिक फिलिस्तीन संयुक्त राष्ट्र में सदस्यता के लिए योग्य है और इसलिए उसे यूएन का सदस्य बनाना चाहिए। इसने सिफारिश की कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद फिलिस्तीन की सदस्यता पर फिर विचार करे। भारत 1974 में फिलिस्तीन मुक्ति संगठन को फिलिस्तीनी लोगों के एकमात्र और वैध प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश था। 1988 में भारत फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले पहले देशों में एक था।

अमेरिका में फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारी हटाए गए

पुलिस ने शुक्रवार तड़के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में फलस्तीन समर्थक तंबू को हटा दिया और फिलाडेल्फिया में पेन्नसीलवेनिया विश्वविद्यालय के परिसर से प्रदर्शनकारियों को बाहर कर दिया। पुलिस ने इस कार्रवाई से कुछ ही घंटे पहले एरीजोना विश्वविद्यालय में एक तंबू को हटा दिया और प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े। एमआईटी परिसर में पुलिस सुबह चार बजे पहुंची और प्रदर्शनकारियों को वहां से जाने के लिए 15 मिनट का समय दिया। विश्वविद्यालय की अध्यक्ष ने कहा कि वहां से नहीं जाने वाले 10 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस बीच, परिसर के बाहर एकत्र हुई भीड़ ने नारेबाजी की लेकिन उसे सुबह छह बजे तक तितर-बितर कर दिया गया।

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