
भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने जगह-जगह हो रहे हिंदू सम्मेलनों को लेकर कहा कि हिंदुत्व धर्म नहीं, यह पहचान है। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। यह केवल लोगों को डराते हैं कि हिंदुओं एक हो जाओ, धर्म खतरे में है। वहीं, आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी कहते हैं कि मुसलमान एक हो जाओ हिंदुओं से खतरा है।
दरअसल, दोनों मिलकर खेल खेलते हैं। न हिंदुओं को खतरा है और न मुसलमानों को। खतरा आपस की लड़ाई के कारण देश को है। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर और मोहम्मद अली जिन्ना ने एक बार देश का बंटवारा कर दिया। अब देश का नहीं मोहल्ले और शहरों का बंटवारा हो रहा है। कई स्थान ऐसे हो गए हैं जहां मुसलमानों ने अपना और हिंदुओं ने अपना अलग मोहल्ला बना लिया है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिंदू धर्म नहीं है। यह कोई वैदिक नहीं बल्कि फारसी शब्द है। जो लोग सिंधु नदी के इस ओर रहते थे वह हिंदू कहलाने लगे। मोहन भागवत जी ठीक कहते हैं कि हिंदू-मुसलमान, हिंदू-ईसाई, हिंदू-सिख। हिंदू एक भौगोलिक शब्द है। हमारा धर्म सनातन है यानी जिसका कोई अंत न हो।
उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस वाले हिंदुत्व के साथी हैं सनातन धर्म के नहीं। अगर होते तो हजारों वर्ष से जो हमारी आस्था है मणिकर्णिका घाट, उसको नहीं तोड़ते। यह आस्था है कि वहां अंतिम संस्कार हो, अस्थियां मणिकर्णिका घाट पर जाकर गंगा जी में विसर्जित करेंगे तो मोक्ष मिलेगा। मां अहिल्या, जिन्होंने काशी विश्वनाथ के मंदिर का निर्माण कराया, उनकी प्रतिमा तोड़ दी गई।