रायपुर । विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास के तहत शुक्रवार को भगवान महावीर स्वामी का समवसरण सजाया गया। इस अवसर पर परमात्मा की पावन स्थापना की गई। इसके साथ ही भगवान महावीर की अंतिम दिव्य देशना के श्रवण का तीन दिवसीय विशेष आयोजन शुरू हुआ।

तीन दिवसीय इस आयोजन में मुनि संवेगरत्न सागर ने पुण्यपाल राजा के आठ स्वप्नों का विस्तृत वर्णन करते हुए उनकी आध्यात्मिक व्याख्या की। उन्होंने बताया कि प्रत्येक स्वप्न में भविष्य से जुड़ी एक गाथा छिपी थी। परमात्मा ने इन स्वप्नों के माध्यम से आने वाले समय की परिस्थितियों और जिनशासन के स्वरूप का संकेत दिया था।



वर्षावास के अंतर्गत 1 से 10 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 8.45 बजे श्रावक-श्राविकाएं भगवान महावीर स्वामी की अंतिम प्रहर की देशना का श्रवण कर रहे हैं। प्रवचन में यह भी बताया जा रहा है कि किस प्रकार श्रावक-श्राविका और साधु-साध्वी जिनशासन की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उसके उज्ज्वल आधार बनेंगे।

चातुर्मास समिति के महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि शुक्रवार को समवसरण की स्थापना के साथ धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर की दिव्य देशना का श्रवण किया। आगामी प्रवचनों में 'भावी की भविष्यवाणी, भगवान महावीर की जुबानी' विषय पर विस्तार से विवेचन होगा।

उन्होंने श्रद्धालुओं से सपरिवार शामिल होकर परमात्मा की अंतिम देशना का लाभ लेने का आग्रह किया। आयोजन प्रतिदिन सुबह 8.45 बजे ज्ञानवल्लभ उपाश्रय, विवेकानंद नगर में हो रहा है।