इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सहयोगी दल यूनाइटेड तोरा जूडिज्म ने विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया है। पार्टी को चुनाव में 7 सीटें मिली हैं।

चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने समर्थन के बदले हरेदी समुदाय के लोगों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने की मांग की है। इजराइल में आमतौर पर नागरिकों के लिए सेना में सेवा देना अनिवार्य है। हालांकि, हरेदी समुदाय के धार्मिक छात्रों को अब तक इससे बड़े स्तर पर छूट मिलती रही है।

नेतन्याहू सरकार हरेदी समुदाय को यह छूट जारी रखने के पक्ष में रही है, जबकि आइजनकोट इसका विरोध करते रहे हैं। वे चाहते हैं कि हरेदी समुदाय के लोगों को भी सैन्य सेवा करनी चाहिए।

यूनाइटेड तोरा जूडिज्म ने आइजनकोट की सरकार में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन देने की पेशकश की है। इसके तहत पार्टी सरकार के खिलाफ होने वाले मतदान में विरोध करने के बजाय वोटिंग से दूर रह सकती है। इससे आइजनकोट को संसद में सरकार चलाने में मदद मिल सकती है।


हरेदी समुदाय के सैन्य सेवा को लेकर विवाद को जानिए

इजराइल में ज्यादातर यहूदियों के लिए सेना में सेवा देना जरूरी है। 1948 में इजराइल बनने के बाद, हरेदी समुदाय के 400 लोगों को यहूदी संस्थानों में पढ़ने के लिए सेना में भर्ती होने से छूट मिली थी।

इसका मकसद धार्मिक विद्वानों की पढ़ाई और परंपरा को बचाए रखना था। लेकिन धीरे-धीरे छूट का दायरा बढ़ता गया। इसी छूट को लेकर आज इजराइल में विवाद है।

दूसरे समुदाय के लोगों का कहना है कि जब देश युद्ध में है, तब सभी को सेना में सेवा देनी चाहिए। नेतन्याहू को हरेदी समुदाय के लोगों का वोट मिलता है। ऐसे में वे इस छूट को बरकार रखना चाहते हैं।

वहीं गादी आइजनकोट का रुख नेतन्याहू से अलग है। वे चाहते हैं कि हरेदी समुदाय के लोगों को भी सेना या नागरिक सेवा में शामिल होना चाहिए।


विपक्षी नेता यायर लैपिड ने कहा है कि चुनाव में नेतन्याहू विरोधी गठबंधन जीता है। उन्होंने सरकार बनाने के लिए थोड़ा समय देने की अपील की है।

द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, नेतन्याहू विरोधी दलों को संसद की 120 में से कुल 67 सीटें मिली हैं, जबकि नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं। उनकी लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है।

लेकिन सरकार बनाने में पेंच यह है कि यहूदी नेतृत्व वाली चार पार्टियों में से तीन- याशर, बियाचाद और इजराइल बेतेनु ने अरब बहुल जॉइंट लिस्ट और राअम के साथ गठबंधन करने से इनकार किया है। इन दलों के समर्थन के बिना विपक्ष के लिए बहुमत जुटाना मुश्किल है।


जॉइंट लिस्ट गठबंधन को जानिए

इजराइल में सभी वोटों की गिनती के बाद जॉइंट लिस्ट गठबंधन को 11 सीटें मिली हैं। यह इजराइल की अरब आबादी के अधिकारों की बात करने वाला राजनीतिक गठबंधन है। इसमें तीन अलग-अलग पार्टियां शामिल हैं। गठबंधन में अरब नेताओं के साथ यहूदी नेता भी हैं।

हदाश: यह वामपंथी पार्टी है। यह अरब और यहूदी नागरिकों की समानता, मजदूरों के अधिकारों और फिलिस्तीन के साथ शांति की वकालत करती है।

ताल: यह अहमद तिबी की पार्टी है। यह अरब नागरिकों के समान अधिकार, शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन करती है।

बलद: यह अरब राष्ट्रवादी विचारधारा वाली धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। यह इजराइल को ऐसा देश बनाने की वकालत करती है, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलें।


2015: जॉइंट लिस्ट पहली बार इजराइली चुनाव से पहले बनी थी। उस समय अरब समुदाय की चार प्रमुख पार्टियों ने एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया था। गठबंधन ने 13 सीटें जीतीं।

2019: सितंबर में हुए चुनाव में भी इसे 13 सीटें मिलीं।

2020: गठबंधन का प्रदर्शन बेहतर रहा और इसे 15 सीटें मिलीं।

2021: आपसी मतभेदों के कारण राअम गठबंधन से अलग हो गई। इसके बाद हदाश और ताल समेत बाकी पार्टियों ने साथ चुनाव लड़ा।

2022: हदाश और ताल ने साथ चुनाव लड़ा, जबकि बलद अलग हो गई। बलद संसद में पहुंचने के लिए जरूरी 3.25% वोट हासिल नहीं कर पाई।

2026: हदाश, ताल और बलद ने फिर साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया। राअम इस बार भी अलग रही।


अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू को चुनाव में जीत की बधाई दी है। उन्होंने लिकुड पार्टी की जीत को बड़ी कामयाबी बताया। मिलेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि लिकुड एक बार फिर इजराइल की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है।

मिलेई ने कहा कि नेतन्याहू ने विरोधी सर्वे और चुनावी अनुमानों के बावजूद अपने नेतृत्व की ताकत दिखाई है। अर्जेंटीना और इजराइल पश्चिमी मूल्यों को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ रणनीतिक साझेदार बने रहेंगे।


रिपोर्ट- नेतन्याहू के सहयोगी ने आइजनकोट को PM पद का ऑफर दिया

नेतन्याहू के सहयोगी दल यूनाइटेड टोरा जूडिज्म ने विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री पद देने का प्रस्ताव दिया है। चैनल 12 न्यूज के मुताबिक, पार्टी इसके बदले हरेदी यहूदियों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने की मांग कर रही है।

पार्टी के पास 7 सीटें हैं। वह आइजनकोट की सरकार में शामिल हुए बिना उसे समर्थन दे सकती है और संसद में उसके खिलाफ वोट नहीं करेगी।

पार्टी के एक नेता ने कहा, “नेतन्याहू से अब हमें कुछ नहीं मिलेगा। उनके साथ हमारा गठबंधन खत्म हो चुका है।”

हालांकि, आइजनकोट सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा के पक्ष में हैं, जबकि यूनाइटेड टोरा जूडिज्म इसका विरोध करती है। ऐसे में दोनों के बीच सहमति बनना मुश्किल हो सकता है।


आइजनकोट बोले- नेतन्याहू चुनाव को बदनाम करने की कोशिश कर रहे

गादी आइजनकोट ने नेतन्याहू पर चुनाव के नतीजों को बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि लिकुड पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर सकी, इसलिए चुनाव पर सवाल उठा रही है।

आइजनकोट ने साफ किया कि वे संसद (नेसेट) की बैठक तय समय पर होने से रोकने नहीं देंगे।


डेमोक्रेट्स नेता गोलान ने आइजनकोट से मुलाकात की

डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख यायर गोलान ने याशर पार्टी के नेता गादी आइजनकोट से मुलाकात की है।

गोलान ने कहा कि दोनों इजराइल की सुरक्षा के लिए लंबे समय तक काम कर चुके हैं और अब देश का बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनके सामने है।

इससे कुछ घंटे पहले गोलान ने बियाचाद के नेता यायर लैपिड से भी मुलाकात की थी।


इजराइल में सरकार बनाने के लिए विपक्षी नेताओं की मुलाकात

सरकार बनाने की कोशिशों के बीच विपक्षी खेमे के दो नेताओं यायर गोलान और यायर लैपिड ने मुलाकात की है। दोनों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने और देश में बदलाव लाने के लिए साथ मिलकर काम करने की बात कही।

डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख यायर गोलान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वे इजराइल को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेंगे।

उन्होंने कहा, “हम साथ मिलकर काम करते रहेंगे। बदलाव का मौका हाथ से नहीं जाने देंगे।”


कतर ने इजराइली चुनाव में दखल के आरोपों को बेतुका बताया

कतर ने इजराइल के चुनाव में दखल देने और अरब वोट बढ़ाने के लिए पैसा देने के आरोपों को खारिज किया है।

कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने इन आरोपों को बेतुका और खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि इजराइली नेता अपनी राजनीतिक नाकामी का दोष कतर पर डाल रहे हैं।

अंसारी ने X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि कुछ इजराइली नेता और मीडिया से जुड़े लोग गलत जानकारी फैलाकर कतर को अपने राजनीतिक विवादों में घसीट रहे हैं।


चुनाव आयोग ने धांधली के आरोपों को बेबुनियाद बताया

चुनाव आयोग ने चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। आयोग के कार्यवाहक महानिदेशक डीन लिवने ने कहा कि चुनाव कानून के मुताबिक हुआ और अब तक गड़बड़ी के कोई सबूत नहीं मिले हैं।

लिवने ने कहा कि मतदान केंद्रों पर चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव आयोग के अध्यक्ष नोआम सोहलबर्ग ने शिन बेट को गोपनीय खुफिया जानकारी के आधार पर जांच करने को कहा है। हालांकि, इस जानकारी की अभी पुष्टि नहीं हुई है।


आइजनकोट बोले- इजराइल में कतर का दखल गंभीर मामला

विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने कहा है कि देश के प्रधानमंत्री कार्यालय और चुनाव प्रक्रिया में कतर का दखल गंभीर मामला है। उन्होंने कतरगेट मामले की निष्पक्ष और तुरंत जांच की मांग की।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पूर्व सलाहकारों पर आरोप हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करते हुए कतर के लिए जनसंपर्क का काम किया था।

आइजनकोट ने कहा कि किसी विदेशी देश का इजराइल के आंतरिक मामलों में दखल नामंजूर है, खासकर तब जब वह देश हमास को आर्थिक मदद देता हो और उसका समर्थन करता हो।


पुलिस बोली- चुनाव में धांधली के सबूत नहीं

इजराइल की पुलिस ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि अरब पार्टियों ने चुनाव में धांधली की।

द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि मतदान के दौरान बहुत कम गड़बड़ियां हुईं। पिछले चुनावों के मुकाबले ऐसी घटनाएं कम रहीं।

अधिकारी ने कहा कि चुनाव में धांधली के आरोपों के समर्थन में जांच या खुफिया जानकारी से जुड़ा कोई सबूत नहीं है। इससे पहले केंद्रीय चुनाव समिति के एक अधिकारी ने भी इन आरोपों को खारिज किया था।


गाजा युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन की 4 तस्वीरें...

इजराइल के यरूशलम और तेल अवीव में बुधवार देर रात गाजा युद्ध के खिलाफ और अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान कई लोग सड़कों पर उतरे।