
मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संचालित विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना में हुए फर्जीवाड़े पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। योजना का गलत लाभ उठाकर विदेश में पढ़ाई करने वाले लाभार्थियों से अब छात्रवृत्ति की राशि की वसूली की जा रही है।
हरियाणा के छात्र अवनीश तंवर से 20 लाख 24 हजार 863 रुपये की रिकवरी की गई है। जांच में सामने आया कि उसने फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र और गलत दस्तावेजों के आधार पर छात्रवृत्ति हासिल की थी। सरकार अब ऐसे अन्य मामलों में भी कार्रवाई तेज कर रही है।
जांच के दौरान पता चला कि जिस पते के आधार पर अवनीश ने जाति प्रमाण पत्र बनवाया था, वहां वह केवल किराए पर रहता था। इसके अलावा आयकर रिटर्न (आईटीआर) और पासपोर्ट में भी गलत पता दर्ज कराया गया था। इन तथ्यों के आधार पर छात्रवृत्ति को अवैध घोषित करते हुए पूरी राशि की वसूली की गई।
विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना की जांच में यह भी सामने आया कि सामान्य वर्ग के 30 से अधिक छात्र-छात्राओं ने खुद को ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग का बताकर योजना का लाभ लिया। इन लाभार्थियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए 20 लाख से 48 लाख रुपये तक की छात्रवृत्ति हासिल की। कुल मिलाकर करीब 10 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान हुआ है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र और गलत दस्तावेजों के आधार पर छात्रवृत्ति लेने वाले सभी लाभार्थियों से राशि की वसूली की जाएगी। अवनीश तंवर से हुई रिकवरी को इस अभियान की पहली बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब शेष मामलों में भी जांच पूरी कर रिकवरी और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।