विजयवर्गीय बोले- ढाई साल में सिर्फ असहयोग और उपेक्षा मिली

Updated on 01-07-2026 01:26 PM
इंदौर, मध्य प्रदेश के सीनियर मिनिस्टर कैलाश विजयवर्गीय की सरकार से नाराजगी एक बार फिर सामने आई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग संभाल रहे विजयवर्गीय ने इस बार सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चिट्‌ठी लिखी है। विजयवर्गीय ने लिखा है कि पिछले ढाई साल से उन्हें असहयोग, उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यदि इंदौर के विकास से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो जनता की आवाज को सार्वजनिक मंच पर उठाना उनकी मजबूरी होगी।

विजयवर्गीय ने पत्र में मास्टर प्लान में देरी, इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम को लेकर आपत्ति, एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के विभाजन, पीथमपुर में सुविधाओं की कमी और सिंहस्थ के कामों में इंदौर की अनदेखी जैसे मुद्दे उठाए हैं। 20 जून की इस चिट्‌ठी के साथ उन्होंने पहले लिखे गए पत्र भी लगाए हैं, जिनमें इंदौर के मास्टर प्लान और मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी का नाम इंदौर केंद्रित रखने की मांग की गई थी।

हालांकि, मीडिया ने इस बारे में जब सवाल किया तो विजयवर्गीय ने कहा- पता नहीं, ये जानकारी आपको कहां से मिली। उधर, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- आपका दर्द व पीड़ा मैं समझ रहा हूं।

इंदौर को न्यायोचित हक नहीं मिल पा रहा

मुख्यमंत्री यादव को लिखे पत्र में विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश के मुखिया और इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री होने के नाते उन्हें सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें लगातार असहयोग और उपेक्षा ही मिली। उनके विभाग से जुड़े स्थानांतरण भी कई बार उनकी जानकारी के बिना कर दिए जाते हैं। इंदौर के विकास की गति बढ़ाने की बात तो दूर, शहर को उसका न्यायोचित हक भी नहीं मिल पा रहा है।

मास्टर प्लान अटका, पहले भी लिखे पत्र

विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर का मास्टर प्लान करीब दो साल पहले मुख्यमंत्री को भेजा जा चुका है। विभागीय और मुख्य सचिव स्तर पर भी कई बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन अब तक इसे जारी नहीं किया गया। पहले भी इस संबंध में पत्र लिखा था, लेकिन न जवाब मिला और न ही कोई चर्चा हुई।

मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम पर आपत्ति

पत्र में विजयवर्गीय ने इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने लिखा कि इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र है और मेट्रोपॉलिटन रीजन की हर चर्चा इंदौर केंद्रित रही है, लेकिन अधिसूचना में इसका नाम “उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन” कर दिया गया। इस पूरे रीजन में इंदौर का हिस्सा शत-प्रतिशत है जबकि उज्जैन का हिस्सा करीब 59 प्रतिशत है।


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