क्या है आगे उम्मीद?
जिन निवेशकों ने IPO में पैसा लगाया था, उनका अनुभव शुरुआती उत्साह के वादों से बिल्कुल अलग रहा है। शेयर शुरू से ही बहुत महंगी वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा था, जिससे गलती की कोई गुंजाइश नहीं बची थी।जब ग्रोथ धीमी हुई और मार्जिन कम हुए, तो बाजार ने जल्दी से उम्मीदें बदल दीं। आज, कुछ तिमाहियों में मामूली सुधार दिखने के बावजूद ब्रोकरेज फर्मों की राय सतर्क बनी हुई है। कुछ बेचने की सलाह दे रहे हैं, जबकि कुछ एक्सपोजर कम करने की सलाह दे रहे हैं। कोई भी इसे 'धमाकेदार बाय' नहीं कह रहा है।



