60s का खूंखार विलेन, मिली दर्दनाक मौत, सेट पर जला, 6 महीने अस्पताल में बीते पर नहीं बची जान

Updated on 03-04-2026 12:27 PM
भारतीय सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्होंने अपनी एक्टिंग की गहरी छाप छोड़ी और काफी समय तक लोगों के दिलों पर राज किया। कई ऐसे कलाकार रहे, जो फिल्मों में आए तो हीरो बनने थे, पर या तो सपोर्टिंग किरदारों में टाइपकास्ट हो गए या फिर विलेन बनकर ही संतोष करना पड़ा। ऐसे ही एक कलाकार रहे एक्टर मनमोहन, जिन्होंने अपने करियर में ज्यादातर नेगेटिव और विलेन के किरदार ही निभाए। मनमोहन ने 60 के दशक में अपना एक्टिंग करियर शुरू किया था और 70s में वह अपने करियर के टॉप पर थे, लेकिन एक हादसे ने सबकुछ खत्म कर दिया। मनमोहन की बहुत दर्दनाक मौत हुई। उनके साथ जो हुआ, उसे जान कोई भी सिहर उठेगा।

1933 में जमशेदपुर में पैदा, पापा थे बिजनेसमैन

मनमोहन 28 जनवरी 1933 को जमशेदपुर में पैदा हुए थे। उनके पिता एक बिजनेसमैन थे और चाहते थे कि बेटा मनमोहन भी बिजनेस करे और उनका हाथ बंटाए। लेकिन मनमोहन को फिल्मों में दिलचस्पी थी। फिल्में देख-देखकर ही उनके मन में एक्टर बनने की चाह जगी। इसीलिए पढ़ाई पूरी करने के बाद मनमोहन ने मुंबई का रुख किया। यह साल 1950 की बात है।

मुंबई आए, 13 साल का स्ट्रगल और फिर मिली पहली फिल्म

मुंबई आने के बाद मनमोहन का असली और लंबा स्ट्रगल शुरू हो गया। वह हीरो बनना चाहते थे, पर हीरो का रोल तो दूर मामली रोल पाने में भी उन्हें खूब एड़ियां घिसनी पड़ीं। करीब 13 साल की कड़ी मशक्कत के बाद साल 1963 में मनमोहन को पहली फिल्म मिली, जिसका नाम था 'ये रास्ते हैं प्यार के', पर इसमें उनका रोल बहुत ही छोटा था। लेकिन कुछ न होने से अच्छा है कि कुछ तो कर रहे हैं। यही सोचकर मनमोहन ने वह फिल्म कर ली।

'शहीद' से बदली किस्मत, चाहते थे हीरो बनना पर बन गए 'विलेन'

फिर साल 1965 में एक्टर मनोज कुमार ने उन्हें फिल्म 'शहीद' ऑफर की। इसमें मनमोहन ने चंद्रशेखर आजाद का किरदार निभाया और छा गए। हर तरफ उनकी खूब वाहवाही हुई। मनमोहन ने सोचा कि अब शायद उन्हें फिल्मों में हीरो वाले रोल मिलने लगेंगे, पर हुआ उल्टा। वह सपोर्टिंग किरदारों तक ही सीमित रह गए और फिर विलेन के रोल या नेगेटिव किरदार मिलने लगे। इस तरह देखते ही देखते मनमोहन की पहचान एक विलेन के रूप में बन गई। फिर ऐसा भी दौर आया कि अगर मनोज कुमार या शक्ति सामंत कोई फिल्म बनाते, तो विलेन के रोल के लिए मनमोहन का नाम ही सुझाते थे। मनमोहन ने अपने करियर में 200 से अधिक फिल्में कीं, पर 46 साल की उम्र में बहुत ही दर्दनाक मौत हो गई।

महाराष्ट्र के गांव में शूटिंग, फटा पेट्रोमैक्स लैंप, 80% झुलसे

दरअसल, मनमोहन एक बार महाराष्ट्र के एक गांव में एक्टर मनोज कुमार के साथ एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। उस गांव में बिजली नहीं थी। शूट के दौरान फिल्म की पूरी टीम उसी गांव में ठहरी हुई थी। वो रात को तंबुओं में सोते थे। मनमोहन भी तंबू में रुके थे और बिजली न होने पर उन्होंने अपने तंबू में पेट्रोमैक्स लैंप लगा लिया। वह लैंप रात में अचानक फट गया और पूरा तंबू जल गया। उसमें मनमोहन भी 80 फीसदी झुलस गए। बताया जाता है कि मनमोहन ने उस वक्त सिल्क का कुर्ता और लुंगी पहनी थी, जिसने तुरंत ही आग पकड़ ली।

6 महीने अस्पताल में रहे, 46 की उम्र में दर्दनाक मौत

मनमोहन को तुरंत ही अस्पताल ले जाया गया। वहां वह छह महीनों तक भर्ती रहे और लगातार इलाज चला, पर लाख कोशिशों के बावजूद मनमोहन ठीक नहीं हो सके। और फिर साल 1979 में 46 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई। उस हादसे के बाद मनमोहन ने एक्टिंग से भी सालभर की दूरी बना ली थी और सोचा था कि ठीक होकर काम पर लौटेंगे, पर वह दिन कभी नहीं आया।

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