वोडाफोन आइडिया को सरकार ने दे दी बड़ी राहत, कंट्रोल के बाद शेयर पर कैसा होगा असर?
Updated on
31-03-2025 01:41 PM
नई दिल्ली: सरकार अब वोडाफोन आइडिया (VIL) में और ज्यादा हिस्सेदारी लेने जा रही है। कंपनी पर स्पेक्ट्रम नीलामी का बकाया था। इसके बदले सरकार 36,950 करोड़ रुपये के नए शेयर खरीदेगी। इससे वोडाफोन आइडिया में सरकार की हिस्सेदारी बढ़कर 48.99 फीसदी हो जाएगी। अभी सरकार के पास कंपनी के 22.6 फीसदी शेयर हैं। कंपनी ने रविवार को यह जानकारी दी। सरकार कर्ज में डूबी वोडाफोन आइडिया को सहारा दे रही है।
कंपनी ने क्या बताया है?
कंपनी ने कहा, 'दूरसंचार क्षेत्र के लिए सितंबर, 2021 में एक सुधार योजना आई थी। इसके तहत स्पेक्ट्रम नीलामी की बकाया राशि को इक्विटी शेयरों में बदलने का फैसला हुआ है। यह वो बकाया है, जो स्थगन अवधि खत्म होने के बाद चुकाया जाना था। संचार मंत्रालय ने यह फैसला किया है कि भारत सरकार को इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इक्विटी शेयरों में बदलने वाली कुल राशि 36,950 करोड़ रुपये है।' इसका मतलब है कि सरकार कंपनी को बकाया चुकाने के लिए पैसे देने के बजाय कंपनी में हिस्सेदारी लेगी।
वोडाफोन आइडिया ने आगे बताया कि सेबी (SEBI) और दूसरे विभागों से अनुमति मिलने के बाद कंपनी 30 दिनों के अंदर शेयर जारी करेगी। ये शेयर 10 रुपये के भाव पर जारी होंगे। कुल 3,695 करोड़ शेयर जारी किए जाएंगे। सेबी शेयर बाजार पर नजर रखता है।
कंपनी ने शेयर बाजार को बताया, 'नए शेयर जारी होने के बाद कंपनी में भारत सरकार की हिस्सेदारी मौजूदा 22.60 फीसदी से बढ़कर लगभग 48.99 फीसदी हो जाएगी।' इसका मतलब है कि सरकार अब कंपनी की सबसे बड़ी मालिक बन जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, वोडाफोन आइडिया पर स्पेक्ट्रम नीलामी का पैसा बकाया था। स्पेक्ट्रम एक तरह का लाइसेंस होता है, जो मोबाइल कंपनियों को नेटवर्क चलाने के लिए सरकार से लेना पड़ता है। कंपनी यह पैसा चुका नहीं पाई, इसलिए उसने सरकार को 22.6 फीसदी हिस्सेदारी दे दी थी। अब सरकार और ज्यादा हिस्सेदारी ले रही है।
यह कदम सरकार ने इसलिए उठाया है ताकि वोडाफोन आइडिया कंपनी बची रहे। अगर यह कंपनी बंद हो जाती तो बहुत सारे लोगों की नौकरी चली जाती और ग्राहकों को भी परेशानी होती। सरकार नहीं चाहती कि टेलीकॉम सेक्टर में सिर्फ दो-तीन कंपनियां ही रहें। इसलिए वोडाफोन आइडिया को बचाने की कोशिश की जा रही है।
शेयर पर कैसा पड़ सकता है असर?
जानकारों का कहना है कि इस कदम से कंपनी को वित्तीय राहत मिलेगी। इससे 5G नेटवर्क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में निवेश करने की क्षमता बढ़ेगी। यह कंपनी के निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। इससे शेयर की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यह शेयर बाजार के सेंटिमेंट पर भी निर्भर करेगा।
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