भोपाल में 24 घंटे में ही बदली पटवारी ट्रांसफर लिस्ट:46 में से 24 पटवारियों के तबादले रद्द

Updated on 19-06-2026 11:18 AM
भोपाल, राजधानी भोपाल में पटवारियों के तबादलों की लिस्ट सिर्फ़ 24 घंटे में ही बदल गई। इससे प्रशासनिक निर्णय पर सवाल खड़े हो गए हैं। 15 जून को जारी स्थानांतरण आदेश में जिन पटवारियों को वर्षों से एक ही तहसील में पदस्थ रहने के कारण हटाया गया था, उनमें से आधे से अधिक को अगले ही दिन राहत मिल गई। महज 24 घंटे के भीतर जारी संशोधित सूची में 46 में से 24 पटवारियों के नाम हटा दिए गए, जिससे तबादले निरस्त हो गए।

कलेक्टर कार्यालय ने 15 जून को 46 पटवारियों के स्थानांतरण का आदेश जारी किया था। इनमें अधिकांश ऐसे कर्मचारी शामिल थे जो 5 से 8 वर्षों से हुजूर और कोलार तहसीलों में पदस्थ थे। कुछ पटवारी अपनी गृह तहसील में भी कार्यरत थे। लेकिन 16 जून को कैबिनेट बैठक के बाद स्थानांतरण की समयसीमा बढ़ने पर देर रात नई सूची जारी हुई, जिसमें कई नाम बाहर कर दिए गए।

सूत्रों के मुताबिक संशोधित सूची में शामिल 30 पटवारियों में से बड़ी संख्या हुजूर और कोलार क्षेत्र की रही। आरोप हैं कि प्रभावशाली संपर्कों के जरिए कुछ पटवारियों ने अपने नाम सूची से हटवा लिए।

स्टिंग में सामने आए नामों को भी मिली राहत संशोधित सूची से हटाए गए पटवारियों में निधि नेमा और किशोर सिंह दांगी भी शामिल हैं। दोनों नाम दो वर्ष पहले हुए एक मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए थे, जिसमें कथित तौर पर पैसों के लेन-देन के वीडियो सामने आए थे।

वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ थे कई पटवारी स्थानांतरण से राहत पाने वाले कई पटवारी 2015 से लेकर 2022 तक लगातार हुजूर और कोलार क्षेत्र में पदस्थ रहे हैं। इनमें सदाशिव गौंड, किशोर सिंह दांगी, नरेंद्र रैकवार, केवल सिंह कौर, रेनु पटेल, बुजकिशोर नागर, अभिषेक शर्मा, मुकुल सराठे, दीक्षा शर्मा, संदीप शर्मा, प्रियंका सिंह, सौरभ सोलंकी, प्रदीप पटेल, पूजा ठाकुर, प्रियंका दुबे, निधि नेमा और अन्य नाम शामिल हैं।

राजनीतिक प्रभाव की भी चर्चा संशोधित सूची से बाहर हुए 24 पटवारियों में से 20 हुजूर तहसील और 4 कोलार क्षेत्र में पदस्थ बताए जा रहे हैं। ये दोनों क्षेत्र विधायक रामेश्वर शर्मा के विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। वहीं बैरसिया क्षेत्र से केवल एक पटवारी का नाम हटने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

20 प्रतिशत तबादला सीमा पर भी सवाल स्थानांतरण नीति के अनुसार किसी जिले में कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत से अधिक तबादले नहीं किए जा सकते। भोपाल जिले में 243 पटवारी पदस्थ हैं, इसलिए अधिकतम 47 तबादले ही संभव हैं।

15 जून को 46 पटवारियों के तबादले किए गए थे। इसके बाद 16 जून को संशोधित सूची जारी होने से कुल 76 स्थानांतरण संबंधी आदेशों की स्थिति बन गई। नीति के जानकारों का कहना है कि निरस्त किए गए आदेश भी स्थानांतरण प्रक्रिया का हिस्सा माने जाते हैं, इसलिए नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आदेश जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में स्थानांतरण नीति की कंडिका-42 के अनुसार सभी तबादला आदेश ई-ऑफिस प्रणाली से जारी किए जाने चाहिए। हालांकि 15 जून का मूल आदेश हस्ताक्षरित (इंक पेन) स्वरूप में जारी किया गया, जबकि 16 जून का संशोधित आदेश ई-ऑफिस के माध्यम से निकला।

गौरतलब है कि संशोधित आदेश में पहले वाले आदेश को स्पष्ट रूप से निरस्त करने का उल्लेख नहीं है। सूत्रों का दावा है कि शिकायतों और लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों के नाम सूची में शामिल किए गए थे, लेकिन बाद में प्रभावशाली हस्तक्षेप के चलते कुछ नाम हटा दिए गए। अब पूरे मामले के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) तक पहुंचने और जांच की संभावना जताई जा रही है।



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