मेडिकल कॉलेज में 'हाई-रिस्क इंजेक्शन' से मरीज की मौत

Updated on 24-06-2026 12:10 PM
 भोपाल, मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में भर्ती एक मरीज की मौत हो गई। बायोप्सी की तैयारी के दौरान ईएनटी वार्ड में भर्ती मरीज को नर्स ने एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की निगरानी के बिना इंजेक्शन लग दिया।

कुछ ही मिनटों बाद मरीज की हालत बिगड़ गई, हार्टबीट रुक गई और डॉक्टरों को करीब 45 मिनट तक सीपीआर देना पड़ा। करीब 11 दिनों तक वेंटिलेटर और आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 23 जून की सुबह मरीज की मौत हो गई।

मृतक की पत्नी ने गोपालगंज थाने में लिखित शिकायत देकर मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन पूरे मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है। वहीं, अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

गले में गांठ की शिकायत पर कराया गया था भर्ती

परिजनों के अनुसार देवेंद्र पाठक को गले में गांठ की समस्या थी। उन्हें 10 जून को सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग के वार्ड क्रमांक-26 में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने जांच के बाद बायोप्सी करने का निर्णय लिया और 13 जून को प्रक्रिया की तैयारी की जा रही थी।

मरीज के बेटे शांतनु पाठक के अनुसार 12 जून को खून सहित अन्य आवश्यक जांचें पूरी कर ली गई थीं। इसी दौरान अस्पताल स्टाफ ने परिजनों से एट्राक्यूरियम बेसीलेट (Atracurium Besylate) इंजेक्शन की तीन वायल मंगवाई थीं।

इंजेक्शन लगते ही बिगड़ी हालत, हार्टबीट रुकने का आरोप

परिजनों का आरोप है कि दवा लाने के बाद ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने इंजेक्शन की एक वायल तुरंत मरीज की आईवी लाइन में लगा दी। उनका दावा है कि इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनटों के भीतर मरीज को सांस लेने में दिक्कत शुरू हो गई।

परिजनों के मुताबिक इसके बाद मरीज की पल्स रेट और हार्टबीट लगातार गिरने लगी और कुछ समय बाद हृदय की धड़कन पूरी तरह बंद हो गई। स्थिति गंभीर होते देख डॉक्टरों की टीम तत्काल सक्रिय हुई।

लंबे प्रयास के बाद मरीज की धड़कन वापस आई

मरीज की हालत बिगड़ने के बाद चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया। लंबे प्रयास के बाद मरीज की धड़कन वापस आई। इसके बाद उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर शिफ्ट कर दिया गया। घटना के बाद मरीज की स्थिति बेहद नाजुक बनी रही। चिकित्सकीय निगरानी में रहा।

परिजन के अनुसार मरीज को वेंटिलेटर पर रखने के बाद उपचार जारी रहा। 17 जून को चार दिन बाद उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया। परिवार को बताया गया कि उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है।हालांकि यह राहत ज्यादा देर तक नहीं रही।

परिजन का दावा है कि 18 जून को आईसीयू में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर मरीज की तबीयत फिर बिगड़ गई। उसका ऑक्सीजन लेवल 66 से नीचे पहुंच गया, जिसके बाद उसे दोबारा वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।

22 जून की रात फिर बिगड़ी हालत, 23 जून को मौत

परिजन के अनुसार 22 जून की रात मरीज की हालत एक बार फिर गंभीर हो गई। डॉक्टरों की टीम ने करीब चार घंटे तक इलाज किया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। 23 जून की सुबह करीब साढ़े छह बजे देवेंद्र पाठक की मौत हो गई। मौत के बाद परिजन ने लापरवाही के आरोपों को लेकर आवाज उठाई।

मोबाइल फोन पर व्यस्त होने का आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इंजेक्शन लगाते समय संबंधित नर्स मोबाइल फोन पर व्यस्त थी और ब्लूटूथ डिवाइस का उपयोग कर रही थी। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही अस्पताल प्रशासन ने इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।

दूसरे मरीज की हालत बिगड़ने का भी दावा

परिजन ने शिकायत में एक और गंभीर दावा किया है। उनका कहना है कि जिस समय देवेंद्र पाठक को इंजेक्शन लगाया गया, उसी दौरान पास के एक अन्य मरीज को भी इंजेक्शन दिया गया था।

परिजनों के अनुसार उस मरीज की हालत भी गंभीर हो गई थी और उसे भी वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था। हालांकि बाद में उपचार के बाद वह स्वस्थ हो गया। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।



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