माइनस 80 चाहिए, ट्विशा का शव हो रहा डिकंपोज, कई अहम सबूत मिट जाएंगे, पूरे MP में सुविधा नहीं

Updated on 21-05-2026 11:52 AM

भोपाल। ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में अब कानूनी लड़ाई के साथ फोरेंसिक संकट भी गहराता जा रहा है। परिवार जहां दोबारा पोस्टमार्टम के लिए हाईकोर्ट पहुंचने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर शव के तेजी से डिकंपोज होने के कारण जांच और जटिल होती जा रही है।

एम्स प्रबंधन ने भोपाल पुलिस को साफ तौर पर बताया है कि शव को सुरक्षित रखने के लिए माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान जरूरी है, लेकिन अस्पताल में केवल माइनस 4 डिग्री तक का फ्रीजर उपलब्ध है। ऐसे में शव का क्षरण लगातार बढ़ रहा है।

एम्स ने इस स्थिति की जानकारी पुलिस को पत्र लिखकर दी थी। इसके बाद पुलिस ने शहर के अस्पतालों में लो-टेम्परेचर फ्रीजर की तलाश शुरू की, लेकिन अब तक माइनस 80 डिग्री की सुविधा नहीं मिल सकी। इसी बीच पुलिस ने स्वजनों को पत्र लिखकर जल्द अंतिम संस्कार करने का अनुरोध भी किया है।

भोपाल कोर्ट ने भी अपने आदेश में साफ कहा है कि शव डिकंपोज हो रहा है और उसे बेहद कम तापमान में सुरक्षित रखने की जरूरत है। कोर्ट ने कटारा हिल्स थाना प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि शव को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखने की व्यवस्था की जाए। हालांकि पुलिस का कहना है कि फिलहाल सबसे कम तापमान वाला फ्रीजर एम्स में ही उपलब्ध है।

विशेषज्ञों ने बताई दोबारा पीएम की बड़ी चुनौती

फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार पहले पोस्टमार्टम के बाद शव का दोबारा पीएम करना आसान नहीं होता। खासकर तब, जब शव कई दिनों तक रखा रहे और डिकंपोज होने लगे।

डिकंपोज शव के दोबारा पीएम में प्रमुख समस्याएं: अशोक शर्मा (रिटायर्ड संचालक मेडिकोलीगल संस्थान भोपाल)

  • पहले पोस्टमार्टम में शरीर के कई हिस्सों और बिसरा को निकाल लिया जाता है।
  • दोबारा जांच में कई महत्वपूर्ण संकेत और प्राकृतिक निशान गायब हो सकते हैं।
  • डिकंपोज शव में नए आर्टिफैक्ट विकसित होने लगते हैं, जो चोट जैसे दिखाई दे सकते हैं।
  • कई बार चोट और डिकंपोजिशन के निशानों में अंतर करना मुश्किल हो जाता है।
  • लंबे समय तक फ्रीजर में रहने से त्वचा और शरीर के रंग में बदलाव आता है, जिससे फोरेंसिक विश्लेषण और कठिन हो जाता है।
  • दोबारा पीएम में यह पूरी तरह फोरेंसिक एक्सपर्ट की समझ और अनुभव पर निर्भर करेगा कि वह असली चोट और डिकंपोजिशन से बने निशानों में फर्क कैसे पहचानता है।

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