मध्य प्रदेश में ट्रांसफर के बाद सामने आई बड़ी अनियमितता, सीनियर्स की कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट लिखेंगे जूनियर्स

Updated on 23-06-2026 12:47 PM
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर के बाद कई विभागों में बड़ी अनियमिता सामने आ रही है। कई स्थानों पर सीनियर्स की जगह बड़े पदों पर जूनियर्स की पोस्टिंग कर दी गई। ऐसे में अब उच्च पदों पर बैठे ये जूनियर अधिकारी सीनियर अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट यानी सीआर लिखेंगे। कई जगह इसको लेकर कर्मचारियों में रोष देखने को मिल रहा है।

एमएसएमई और कृषि विभाग में वरिष्ठता की अनदेखी

मध्य प्रदेश में कृषि विभाग के बाद अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। एमएसएमई में निचले स्तर के कई प्रभारी प्रबंधकों को सीधा जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्रों का महाप्रबंधक (जीएम) बना दिया गया है। यह फैसला तब लिया गया है जब विभाग के पास एमपीपीएससी द्वारा चयनित 2016, 2017 और 2019 बैच के 60 से अधिक योग्य वर्ग-2 (राजपत्रित) अधिकारी पहले से मौजूद हैं।

एक ही पद पर दो अधिकारियों की नियुक्ति

वाणिज्यिक कर विभाग और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में स्थानांतरण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन देखने को मिला है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में कई स्थानों पर एक ही पद के लिए दो-दो अधिकारियों की पोस्टिंग कर दी गई है, जिससे भारी असमंजस की स्थिति है। इंदौर में पदस्थ चीफ इंजीनियर योगेंद्र कुमार को उनके मूल पद से सीधे दो स्तर ऊपर का प्रभार दे दिया गया, जिस पर अन्य अधिकारियों ने वरिष्ठता क्रम के उल्लंघन की कड़ी आपत्ति जताई है।

ग्रामीण विकास विभाग में विरोध के बाद हुआ सुधार

ग्रामीण विकास विभाग में 40 से अधिक योग्य अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद लगभग 33% पदों को नियम विरुद्ध तरीके से भरा गया था। हालांकि, कड़े विरोध के बाद विभाग ने अपनी गलतियों में सुधार किया है। इंदौर संभाग में अतिरिक्त संचालक स्तर के अधिकारी दीतू सिंह राणदा को उनके मूल पद से नीचे 'संयुक्त आयुक्त' के पद पर रखा गया था। वहीं भोपाल में, जनपद स्तर के सीईओ विनोद यादव को पदोन्नत कर 'संयुक्त आयुक्त' का प्रभार दे दिया गया था।

मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों का खुला उल्लंघन

प्रशासनिक विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया मप्र सिविल सेवा नियम, 1961 के खिलाफ है। नियमों के अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था पदानुक्रम के सिद्धांत पर काम करती है। कोई भी कनिष्ठ (जूनियर) अधिकारी कभी भी अपने वरिष्ठ (सीनियर) का 'नियंत्रण प्राधिकारी' नहीं हो सकता।

किसी जूनियर को उच्च पद का प्रभार देकर उसे अपने सीनियर की वार्षिक सीआर लिखने का अधिकार देना 'सर्विस ज्यूरिसप्रूडेंस' के मूल सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है।



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