स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ईरान, ओमान को मिला टोल वसूलने का अधिकार, ट्रंप ने तेहरान की शर्तों को माना, अमेरिका कैसे झुका?

Updated on 08-04-2026 12:02 PM
तेहरान/वॉशिंगटन: होर्मुज स्ट्रेट को अगले 2 हफ्तों कर इस शर्त के साथ खोलने की इजाजत ईरान ने दी है कि वो इस दौरान इस संकरे समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से तेहरान टोल वसूलेगा। ईरान के साथ साथ ओमान को भी फायदा हुआ है और उसे भी टोल का हिस्सा मिलेगा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दो हफ्ते की सीजफायर योजना में ईरान और ओमान दोनों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की अनुमति देना शामिल है। अधिकारी का कहना है कि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल पुनर्निर्माण के लिए करेगा। हालांकि फिलहाल यह अभी साफ नहीं है कि ओमान अपने पैसे का इस्तेमाल किस काम के लिए करेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान, दोनों के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है। दुनिया इस मार्ग को एक अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग मानती रही है और उसने पहले कभी इस पर कोई टोल नहीं दिया था। टाइम्स ऑफ इजरायल ने ईरान-अमेरिका युद्धविराम में शामिल अधिकारी के हवाले से नाम नहीं छापने की शर्त पर ये जानकारी दी है। आकलन के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट से अगर प्रति जहाज 10 मिलियन डॉलर का टोल वसूला जाए तो ईरान को हर महीने करीब साढ़े 4 अरब डॉलर का टोल मिल सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट से ईरान और ओमान वसूलेंगे टोल

युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के कुल तेल कारोबार का 20 प्रतिशत हिस्सा इससे गुजरता था। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद तेहरान ने होर्मुज को बंद कर दिया। इसका गंभीर असर एशियाई देशों पर देखने को मिला है। अगर टोल लगने की बात सच साबित होती है तो इसका मतलब ये हुआ कि होर्मुज अब यह एक मुक्त अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग नहीं रह जाएगा। इसके अलावा दुनिया के कई ऐसे समुद्री रास्ते हैं जिन्हें कंट्रोल करने वाले देश टोल की मांग करेंगे। जैसे मलक्का स्ट्रेट।
होर्मुज से टोल वसूलने को लेकर ईरान ने सख्त रवैया अपना रखा था। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि जहाज इस जलडमरूमध्य से "ईरान के सशस्त्र बलों के साथ तालमेल बिठाकर" गुजर सकते हैं। ईरान की दस-सूत्रीय योजना में साफ तौर पर "ईरान के सशस्त्र बलों के साथ तालमेल बिठाकर होर्मुज जलडमरूमध्य से नियंत्रित गुजरने" की बात कही गई है। इस योजना में यह भी बताया गया है कि यह प्रावधान ईरान को "एक अनोखी आर्थिक और भू-राजनीतिक स्थिति" प्रदान करता है।

अमेरिकी बयान में होर्मुज में टोल का जिक्र नहीं

हालांकि डोनाल्ड ट्रंप और वाइट हाउस की तरफ से जो बयान जारी किए गये हैं उन्हें होर्मुज से टोल वसूले जाने और ईरानी सेना के साथ तालमेल बनाकर जहाजों के गुजरने को लेकर कोई बात नहीं की गई है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ बातचीत के आधार पर, जिसमें उन्होंने मुझसे अनुरोध किया कि मैं आज रात ईरान भेजे जा रही विनाशकारी ताकत को रोक लूं, और इस शर्त पर कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत हो जाए, मैं दो हफ्तों की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को रोकने पर सहमत हूं। यह एक दो-तरफा युद्धविराम होगा!"

होर्मुज से टोल का स्ट्रक्चर क्या हो सकता है?

ईरान ने युद्ध के दौरान कुछ जहाजों से टोल वसूले हैं लेकिन वो जहाज किस देश के थे और कितना टोल वसूला गया इसली सटीक जानकारी नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स में टोल 10-15 मिलियन डॉलर की बात कही गई है। लेकिन कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर ईरान को टोल वसूलने का अधिकार दिया जाता है तो वो 2 मिलियन डॉलर प्रति जहाज हो सकता है। इसके अलावा जहाज के प्रकार, माल और मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर टोल की स्थिति भी बदल सकती है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इन शुल्कों के कारण वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री शिपिंग नियमों में स्थायी बदलाव आ सकता है।
ईरान-इराक जाइंट चैंबर के मुताबिक यदि होर्मुज स्ट्रेट पर टोल लगाया जाता है तो ईरान हर साल 70-80 अरब डॉलर कमा सकता है। इसमें ओमान का कितना हिस्सा होगा फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है। कुछ अन्य अनुमानों में 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष तक का टोल होने का अनुमान लगाया गया है। कुछ एक्सपर्ट्स का आकलन है कि मिस्र स्वेज नहर पर टोल से हर महीने 700 से 800 मिलियन डॉलर कमाता है और ईरान को भी करीब ऐसा ही फायदा होगा।

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