'भारत ने मेरे कहने पर रूसी तेल खरीदना कम किया', ट्रंप ने किया बड़ा दावा, जानें क्या है सच्चाई

Updated on 21-02-2026 12:26 PM
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने उनके कहने पर रूस के साथ तेल आयात बहुत कम कर दिया। वॉइट हाउस एक प्रेस ब्रीफिंग में ट्रंप ने भारत के साथ शानदार रिश्ते का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'भारत ने रूप से अपना व्यापार वापस खींच लिया। भारत अपना तेल रूस से ले रहा था। उन्होंने मेरे कहने पर बहुत पीछे खींच लिया क्योंकि हम एक भयानक युद्ध (रूस-यूक्रेन) को खत्म करना चाहते हैं, जिसमें हर महीने 25000 लोग मर रहे हैं।' इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी के साथ उनके बहुत अच्छे रिश्ते हैं।

सर्जियो गोर ने भी दिया बयान

इस बीच भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक बार फिर दोहराया कि भारत ने रूसी तेल नहीं खरीदने का वादा किया है। गोर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में AI सम्मेलन के दौरान भारत के पैक्स सिलिका पहल से जुड़ने के बाद कही। उन्होंने कहा, हमने भारत को अपने तेल में विविधता लाते देखा है। यह केवल भारत के बारे में नहीं है। अमेरिका नहीं चाहता है कि कोई भी रूसी तेल खरीदे।

भारत पर अमेरिका ने लगाया था टैरिफ

अमेरिका ने पिछले साल अगस्त के आखिर रूसी तेल खरीदने पर भारत के ऊफर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। इस घोषणा के बाद भारत के ऊपर कुल टैरिफ 50 फीसदी हो गया था। हाल ही में नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट के बाद भारी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। टैरिफ हटाते समय वॉइट हाउस ने कहा था कि भारत ने सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल का आयाद बंद करने का वादा किया है।

भारत ने रूसी तेल पर क्या कहा?

इसके साथ ही अमेरिका ने यह भी कहा था कि भारत अमेरिका के ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा और अगले 10 साल में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए एक फ्रेमवर्क पर भी वादा किया है। हालांकि, भारत ने हाल में रूसी तेल की खरीद कम की है लेकिन यह साफ किया है कि उसका फैसला ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बदलाव से जुड़ा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
जयशंकर ने कहा, 'हम स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी से बहुत जुड़े हुए हैं, क्योंकि यह हमारे इतिहास और हमारे विकास का एक अहम हिस्सा है। यह कुछ ऐसा है जो बहुत गहरा है और पॉलिटिक्ल स्पेक्ट्रम से भी अलग है।' भारतीय विदेश मंत्री ने वैश्विक तेल बाजार को बहुत कॉम्प्लेक्स और डायनमिक बताया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खरीद का फैसला कमर्शियल हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाता है।

राष्ट्रीय हित से प्रेरित भारत का फैसला

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, 'जयशंकर ने कहा था कि जहां तक ऊर्जा मुद्दे की बात है, यह आज एक कॉम्प्लेक्स मार्केट है। भारत में तेल कंपनियां, यूरोप की तरह, शायद दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी, उपलब्धता, कीमत, जोखिम को देखती हैं और वे फैसले लेती हैं, जो लगता है कि उनके सबसे अच्छे हित में हैं।' ट्रंप के दावों के उलट भारत ने लगातार कहा है कि भारत ऊर्जा से जुड़े अपने फैसले राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर करता है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा था कि नेशनल इंटरेस्ट भारत के ऊर्जा से जुड़े फैसलों को गाइड करता रहेगा।

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