ग्लोबल सॉफ्ट पॉवर रैंकिंग में US-चीन के बीच कड़ी टक्कर, टॉप-10 देशों की लिस्ट में फिसला भारत

Updated on 02-04-2026 12:55 PM
लंदन: आधुनिक युग में वैश्विक प्रभाव सिर्फ सैन्य शक्ति या देशों के आकार से तय नहीं होते। बल्कि अब देश संस्कृति, कूटनीति, तकनीक और वैश्विक प्रतिष्ठा पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। ये वो फैक्टर्स हैं जो 'सॉफ्ट पॉवर' को दर्शाते हैं। 'ब्रांड फाइनेंस ग्लोबल सॉफ्ट पावर इंडेक्स 2026' लंदन ने सॉफ्ट पॉवर के आधार पर देशों को रैंक किया है। इस लिस्ट से पता चलता है कि जहां पश्चिमी देशों की मजबूत स्थिति बनी हुई है वहीं एशियाई देशों ने भी अपनी स्थिति में विस्तार किया है। ऐशियाई देश अब तेजी से वैश्विक प्रभाव का विस्तार कर रहे हैं।

सॉफ्ट पॉवर क्या होता है- सॉफ्ट पावर का मतलब किसी देश की उस क्षमता से है जिससे वह बिना किसी जोर-जबरदस्ती के वैश्विक धारणाओं को आकार दे सकता है और अंतर्राष्ट्रीय व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। यह बल के बजाय आकर्षण को दर्शाता है और इसमें सांस्कृतिक निर्यात, कूटनीतिक पहुंच, शासन के स्टैंडर्ड, आर्थिक भागीदारी और इनोवेशन के क्षेत्र में नेतृत्व शामिल हैं। 2026 का इंडेक्स वैश्विक सर्वेक्षणों के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों का मूल्यांकन करता है, जिनमें उनकी पहचान, प्रतिष्ठा और प्रभाव को मापा गया है।

सॉफ्ट पावर के आधार पर शीर्ष 10 देश (2026)

ब्रांड फाइनेंस ग्लोबल सॉफ्ट पावर इंडेक्स 2026 के मुताबिक इस लिस्ट में शामिल टॉप-10 देशों में पहले नंबर पर अमेरिका, दूसरे नंबर पर चीन, तीसरे नंबर पर जापान, चौथे नंबपर पर यूके, पांचवें नंबर पर जर्मनी, छठे नंबर पर फ्रांस, सातवें नंबर पर स्विट्जरलैंड, आठवें नंबर पर कनाडा, नौवें नंबर पर इटली और दसवें नंबर पर संयुक्त अरब अमीरात है।विजुअल कैपिटलिस्ट के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका 74.9 के स्कोर के साथ रैंकिंग में सबसे आगे है जो चीन से महज़ 1.4 अंक ज्यादा है। यह मामूली अंतर टेक्नोलॉजी, व्यापार, संस्कृति और भू-राजनीतिक नेतृत्व के क्षेत्रों में प्रभाव जमाने के लिए बढ़ते वैश्विक मुकाबले को दर्शाता है। मनोरंजन, उच्च शिक्षा, तकनीकी नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों में अपने वैश्विक वर्चस्व के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका अपना प्रथम स्थान बनाए हुए है। अमेरिकी विश्वविद्यालय, बहुराष्ट्रीय निगम और उसकी मीडिया इंडस्ट्री ग्लोबल नैरेटिव को लगातार आकार दे रहे हैं।

अमेरिका को पछाड़ने के करीब पहुंचा चीन

अमेरिका के बाद चीन दूसरे स्थान पर उसके ठीक पीछे है जो उसके बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव, 'बेल्ट एंड रोड' इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, विनिर्माण क्षमता और बढ़ती सांस्कृतिक उपस्थिति को दर्शाता है। उसकी 'सॉफ्ट पावर' में हुई यह वृद्धि वैश्विक जुड़ाव को लेकर पिछले कुछ सालों में उसकी तरफ से उठाए गये कदमों के असर को दिखाता है। इन दोनों शक्तियों के बीच सिर्फ 1.4 अंकों का यह मामूली अंतर वैश्विक प्रभाव के बदलते संतुलन को दिखा रहा है।
इसके अलावा शीर्ष 20 की सूची में पश्चिमी यूरोप का दबदबा है। यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और फ्रांस अपने पहले से बनाए मजबूत राजनयिक नेटवर्क, सांस्कृतिक संस्थानों और यूरोपीय संघ के भीतर आर्थिक एकीकरण की वजह से उच्च स्थान पर बने हुए हैं। स्विट्जरलैंड और कनाडा का स्कोर 63.2 है जो बिल्कुल एक जैसा है। उन्हें राजनीतिक स्थिरता, मजबूत शासन और जीवन की उच्च गुणवत्ता का फायदा मिला है। इटली अपनी सांस्कृतिक विरासत, फैशन, खान-पान और पर्यटन के जरिए अपना प्रभाव बनाए रखता है।

भारत का भी ग्लोबल स्टेज पर बढ़ रहा कद

जापान वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है जो उसके तकनीकी नेतृत्व, वैश्विक ब्रांडों और मीडिया, डिजाइन और इनोवेशन के माध्यम से उसकी व्यापक सांस्कृतिक अपील को दर्शाता है। दक्षिण कोरिया भी शीर्ष 15 देशों में शामिल है जिसे मनोरंजन के निर्यात और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र से बढ़ावा मिला है।
भारत और एशिया की अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं मध्य-स्तरीय रैंकिंग में आती हैं। हालांकि वे शीर्ष 10 में शामिल नहीं हैं फिर भी वे बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव और बढ़ती वैश्विक पहचान का प्रदर्शन करती हैं। इस सूची में भारत 32वें स्थान पर है जिसका स्कोर 48.0 है। पिछले वर्ष (2025) के मुकाबले भारत 2 पायदान नीचे खिसका है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सॉफ्ट पावर के पीछे सांस्कृतिक विरासत, योग, आयुर्वेद, भारतीय व्यंजन और बॉलीवुड का वैश्विक प्रभाव है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध में भी मजबूती को दिखाया गया है

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