बच्चों को नंबरों के गेम में मत उलझाओ:सेज यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. संजीव अग्रवाल की पेरेंट्स को सलाह

Updated on 03-07-2026 03:33 PM
भोपाल, आज के दौर में जहां हर पेरेंट अपने बच्चे को नंबरों की दौड़ में आगे देखना चाहता है, वहीं सेज यूनिवर्सिटी के चांसलर और सेज ग्रुप के सीएमडी डॉ. संजीव अग्रवाल का मानना कुछ अलग है। उन्होंने बताया कि कैसे सेज यूनिवर्सिटी सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर छात्रों की स्किल्स और उनके समग्र (होलिस्टिक) विकास पर काम कर रही है, ताकि हर छात्र सिर्फ नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला यानी एक जॉब क्रिएटर बनकर निकले।

सीएसआर, एजुकेशन, हेल्थकेयर, रियल एस्टेट, इंडस्ट्री, इलेक्ट्रिकल इंफ्रा और हॉस्पिटैलिटी जैसे कई सेक्टर में अपनी पहचान बना चुके डॉ. संजीव अग्रवाल के दिल के सबसे करीब एजुकेशन है। वे मानते हैं कि बाकी सभी सेक्टर बिजनेस की जरूरत हैं, लेकिन शिक्षा के माध्यम से ही समाज और राष्ट्र की नींव तैयार होती है। शिक्षा के माध्यम से ही हर बच्चा संस्कारवान और अच्छा व्यक्ति बन सकता है। उनका मानना है कि यही जिम्मेदारी उन्हें बाकी सभी कार्यों से ज्यादा संतुष्ठी प्रदान करती हैं। यही वजह कि "मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे देश के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी दी।"

डॉ. संजीव अग्रवाल बताते हैं कि सेज ग्रुप में हमने "करना पड़ता है" का सिद्धांत लागू किया, जिसका मतलब है कि बहानों की कोई गुंजाइश नहीं। अगर कोई छात्र कक्षा में गैरहाजिर रहता है, तो सिर्फ फोन कॉल से बात खत्म नहीं होती, संस्थान के ट्यूटर सीधे उसके घर तक पहुंच जाते हैं। साथ ही, बच्चों को इतना खुला माहौल दिया जाता है कि वे प्रकृति को करीब से समझें और व्यावहारिक सोच विकसित करें। इसके अलावा सेजेक्स के प्रोग्राम के जरिए भी छात्रों की स्किल्स को लगातार मजबूत किया जाता है। इस पर वे कहते हैं, "सेजेक्स के प्रोग्राम को हर स्टूडेंट को करना चाहिए, इसमें अच्छा डिस्काउंट मिलता है।" इंडस्ट्री के साथ जुड़ाव बनाए रखने के लिए कैंपस में सीईओ और फाइनेंस हेड्स जैसे दिग्गजों को बुलाया जाता है, साथ ही स्टार्टअप कॉन्क्लेव और करियर डे जैसे आयोजन भी नियमित रूप से होते रहते हैं। अपने छात्र जीवन को याद करते हुए डॉ. संजीव अग्रवाल बताते हैं कि उनके दौर में पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित हुआ करती थी, शिक्षक जो किताबों में लिखा है, वहीं पढ़ाते और सिखाते थे, लेकिन अब दौर बदल गया है। आज सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि पढ़ाई के साथ-साथ स्किल्स पर भी उतना ही जोर दिया जाता है, यही वजह है कि आज वे खुद अपने छात्रों को बिजनेस के गुर भी सिखाते हैं। उन्होंने बताया कि जब वे खुद स्कूल-कॉलेज लाइफ में थे, तब पिताजी का डर कहीं न कहीं इस बात को लेकर भी रहता था कि कहीं नंबर कम न आ जाएं। हालांकि उनका मानना है कि नंबरों का यह दबाव आज भी बच्चों पर उतना ही बना हुआ है, बल्कि कई बार माता-पिता खुद बच्चों को इस दौड़ में उलझा देते हैं।

युवा बिजनेसमैन और क्रिएटर्स बनने के इच्छुक लोगों के लिए डॉ. संजीव अग्रवाल का संदेश सीधा और प्रेरक है, मेहनत करें, सबको साथ लेकर चलें और निरंतर प्रयास करते रहें। यही सीख वे अपने ग्रुप के हजारों कर्मचारियों को भी देते हैं। इस पर वे कहते हैं, "मैं ग्रुप के हजारों कर्मचारियों को एक ही संदेश देता हूं कि मेहनत कीजिए, सफलता जरूर मिलेगी।" उनका मानना है कि अगर तुरंत सफलता हाथ न लगे तो निराश होने की जरूरत नहीं, क्योंकि हो सकता है ईश्वर इससे भी बड़ी सफलता के लिए रास्ता तैयार कर रहा हो।



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