
भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के चिकित्सकों ने दांत और मुंह की सर्जरी के लिए एक ऐसा अनोखा 'बहुउद्देश्यीय शल्य उपकरण' विकसित किया है, जिसे भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर पेटेंट प्रदान किया है। यह उपकरण 'स्विस नाइफ' (एक ही चाबी के गुच्छे में कई औजार) की तरह काम करता है, जो दंत इम्प्लांट और छोटी सर्जरी को न केवल सरल बनाएगा, बल्कि मरीजों के लिए इसे अधिक सुरक्षित और कम खर्चीला भी कर देगा।
दंत चिकित्सा के दौरान अक्सर डॉक्टरों को अलग-अलग चरणों में कई तरह के उपकरणों की जरूरत पड़ती है, जिससे सर्जरी लंबी और जटिल हो जाती है। इस समस्या का समाधान एम्स के मुख्य आविष्कारक डॉ. अंशुल राय और उनकी टीम ने खोजा है।डॉ. राय के साथ डॉ. बाबूलाल, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. जेनिश भट्टी और डॉ. मोनिका राय ने मिलकर इस काम्पैक्ट टूल को डिजाइन किया है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह एक ही उपकरण सर्जरी के कई चरणों को पूरा कर सकता है, जिससे डॉक्टर को बार-बार औजार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
यह उपकरण हल्का और छोटा है, जिसके कारण इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। गांवों में लगने वाले दंत शिविरों में भारी मशीनों की जगह यह छोटा उपकरण कारगर होगा। चलते-फिरते क्लीनिकों के लिए यह सबसे उपयुक्त है। छोटे शहरों के डॉक्टर कम लागत में आधुनिक सर्जरी कर सकेंगे।
डॉ. अंशुल राय ने बताया कि अभी तक डेंटल सर्जरी के कई उन्नत उपकरण विदेशों से मंगवाने पड़ते थे, लेकिन अब एम्स भोपाल का यह नवाचार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मेधा का लोहा मनवाएगा। एम्स भोपाल के इस शोध से न केवल चिकित्सा जगत को मजबूती मिलेगी, बल्कि आम नागरिकों को भी सुलभ और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।