भोपाल एम्स में पांच महीने से बंद पड़ी कैंसर जांच मशीन, मरीजों पर बढ़ा इलाज और खर्च का बोझ

Updated on 26-05-2026 12:14 PM

भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल में कैंसर मरीजों की जांच व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। पैथोलाजी विभाग की अत्याधुनिक आईएचसी (इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री) मशीन पिछले पांच महीनों से तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी है।

इस मशीन के बंद होने से कैंसर मरीजों के सटीक डायग्नोसिस और इलाज में भारी देरी हो रही है। गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को मजबूरी में निजी लैबों का रुख करना पड़ रहा है, जहां जांच के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

सटीक कैंसर जांच प्रभावित

  • डॉक्टरों के अनुसार आईएचसी जांच कैंसर के प्रकार और उसकी स्टेज पहचानने के लिए बेहद जरूरी होती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर मरीज की कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या सर्जरी की योजना तय की जाती है। मशीन बंद होने से मरीजों की रिपोर्ट समय पर नहीं मिल पा रही है, जिससे इलाज में देरी हो रही है।
  • एम्स में यह जांच पहले बेहद कम और रियायती दरों पर उपलब्ध थी, लेकिन अब मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में 4,000 से 8,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह स्थिति और अधिक परेशानी पैदा कर रही है।
  • गरीब मरीजों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

    • सतना से अपनी मां का इलाज कराने आए शिवोय तिवारी ने बताया कि डाक्टर ने उनकी मां की आईएचसी जांच लिखी थी, लेकिन अस्पताल में मशीन खराब होने की जानकारी मिली। मजबूरी में उन्हें निजी लैब से महंगी जांच करानी पड़ी।

  • मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि एम्स जैसे बड़े सरकारी संस्थान में महीनों तक मशीन बंद रहना गंभीर लापरवाही है। इससे गरीब मरीजों का भरोसा भी प्रभावित हो रहा है।
  • अन्य जांचों में भी लंबा इंतजार

    • एम्स भोपाल में सिर्फ आईएचसी जांच ही प्रभावित नहीं है, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण जांचों के लिए भी मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कैंसर मरीजों के लिए होने वाले पेट स्कैन की तारीख दो से तीन महीने बाद मिल रही है। वहीं एमआरआई जांच के लिए मरीजों को चार से पांच महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है।
    • सामान्य मरीजों को भी सीटी स्कैन के लिए 15 से 30 दिन बाद की तारीख दी जा रही है। गंभीर मरीजों के परिजन जल्द जांच के लिए लगातार अस्पताल प्रबंधन से गुहार लगा रहे हैं।

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