
अभ्यर्थियों का कहना था कि दोनों भर्तियों में नाममात्र के पद घोषित किए गए हैं, जिससे बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए हैं। इस मुद्दे को लेकर हम पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। तपती धूप में जल्द नियुक्ति की मांग को लेकर डटे रहे चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ग-3 के तहत 13 हजार से अधिक पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया करीब एक साल से लगातार कानूनी पेचीदगियों और कोर्ट केस के भंवर में फंसी हुई है।
कुछ उम्मीदवारों की लापरवाही और तकनीकी गलतियों का खामियाजा आज हजारों योग्य युवाओं को भुगतना पड़ रहा है, जो दिन-रात मेहनत कर मेरिट में आए हैं और ज्वाइनिंग का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2025 में चयन परीक्षा आयोजित की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दो बार डीपीआई ने सुधार करने का मौका दिया था। चयनित अभ्यर्थियों ने डीपीआई आयुक्त और मप्र कर्मचारी चयन मंडल में भी ज्ञापन दिया।