फर्जी काॅलेजों को संबद्धता देने के कारण 91 दिन पहले बीयू के कुलगुरु ने दिया त्याग-पत्र, लोकभवन ने किया मंजूर

Updated on 20-06-2026 12:53 PM

 भोपाल। बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय (बीयू) के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन की अंततः रवानगी हो गई। उन्होंने कार्यकाल समाप्त होने से 91 दिन पूर्व ही पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे कुलाधिपति राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने तत्काल स्वीकार कर लिया है।

उनकी जगह विवि के प्रबंध संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. विवेक शर्मा को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया है, लेकिन यह घटनाक्रम जितना सहज दिखता है, उतना है नहीं।

दरअसल, कुलगुरु एसके जैन का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है। कई बार उनके लापता होने के पोस्टर विश्वविद्यालय में लगे तो प्रशासनिक पकड़ ढीली होने के आरोपों का सामना भी करना पड़ा।

ताजा घटनाक्रम बीएड कॉलेजों की संबद्धता से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जांच में कई काॅलेज ऐसे पाए गए, जो वर्षों से केवल कागजों पर ही संचालित हो रहे थे। धरातल पर कुछ था ही नहीं। इसे लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 33 घंटे तक कुलगुरु का कार्यालय घेर कर रखा।

मामला इतना बढ़ गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से रिपोर्ट तलब की। इसके बाद आनन-फानन में उनका अर्जित अवकाश स्वीकृत कर 25 जून तक के लिए छुट्टी पर भेज दिया गया। फिर भी विवाद गहराता जा रहा था। सरकार के स्पष्ट संदेश को भांपते हुए उन्होंने त्यागपत्र दे दिया।

बता दें कि प्रो. जैन का कार्यकाल 17 सितंबर को समाप्त हो रहा था। इससे पहले वह उज्जैन इंजीनियरिंग कालेज में प्राचार्य के पद पर थे।

ऐसा रहा विवादों से नाता

  • सीएम हेल्पलाइन में अपने ही विवि के कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने शिकायत की थी कि कर्मचारी उन्हें नियुक्ति से संबंधित फाइल उपलब्ध नहीं कराते हैं।
  • कर्मचारियों में पहले से ही असंतोष व्याप्त था कि उनके हित में कोई भी कार्य नहीं किए।
  • पौने चार साल के कार्यकाल में विवि में सिर्फ मुख्य गेट और कुलुगुरु का कार्यालय निर्मित हुआ।
  • पीएम ऊषा योजना के तहत स्वीकृत 100 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं हो पाए।
  • नैक की ग्रेडिंग को लेकर विवाद रहा।

36 कॉलेजों की संबद्धता के मामले में मचा बवाल

सबसे अधिक बवाल तब मचा, जब विश्वविद्यालय द्वारा गठित निरीक्षण समितियों ने 129 कॉलेजों का निरीक्षण किया। जांच में कई संस्थानों में लैब, लाइब्रेरी, फैकल्टी और आधारभूत सुविधाओं की कमी भी सामने आई। आखिर वर्षों तक बिना सत्यापन के ऐसे संस्थानों को मान्यता संबद्धता कैसे मिलती रही। इस खुलासे के बाद एबीवीपी ने 12 जून से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया था।


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