ठोस नीतियों की जरूरत
नियमों के मुताबिक, सभी बैंकों को डिजिटल बैंकिंग के लिए ठोस नीतियां बनानी होंगी। इसमें उन्हें कानूनी जरूरतों के साथ-साथ पैसों की उपलब्धता (लिक्विडिटी) और डिजिटल कामकाज में आने वाले जोखिमों का भी ध्यान रखना होगा। डिजिटल बैंकिंग का मतलब उन सेवाओं से है जो बैंक इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग या ग्राहकों के किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए देते हैं, जहां काम का बड़ा हिस्सा मशीनों या ऑटोमेशन के जरिए होता है।रिजर्व बैंक ने बताया कि पिछले करीब छह महीने से चल रही नियमों को समेटने की उसकी बड़ी कवायद पूरी हो गई है। इस अभियान के तहत 5,673 ऐसे पुराने सर्कुलर्स को रद्द कर दिया गया है, जो अब बेकार हो चुके थे।



