मप्र में 10 साल बाद सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन की सुगबुगाहट

Updated on 26-06-2026 02:34 PM
 भोपाल। प्रदेश में दस साल बाद एक बार फिर पदोन्नति को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन के पदोन्नति नियम 2025 पर कोई स्थगन न होने के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों को पदोन्नति देने की तैयारी करने संबंधी निर्देश के बाद विभागों में पुरानी फाइलें खुल गईं। दिनभर विभागीय अधिकारी इस तैयारी में लगे रहे कि यदि विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक जल्द करनी पड़ी तो क्या-क्या करना होगा। उधर, सामान्य प्रशासन विभाग ने पदोन्नति के लिए पद निर्धारित करने 29 जून को सभी विभागों के अधिकारियों की बैठक बुलाई है।

निर्णय सुरक्षित रखा गया है

उल्लेखनीय है कि पदोन्नति नियम 2025 को लेकर हाई कोर्ट जबलपुर में सुनवाई पूरी हो चुकी है और निर्णय सुरक्षित रखा गया है। मई 2016 में हाई कोर्ट जबलपुर ने पदोन्नति नियम 2002 को निरस्त किया था। चूंकि सरकार किसी कर्मचारी को पदावनत नहीं करना चाहती थी, इसलिए निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। वहां प्रकरण विचाराधीन रहने के दौरान मोहन सरकार ने 2025 में नए नियम बनाए और उन्हें लागू भी कर दिया। इसमें फिर कुछ ऐसे प्रविधान किए गए, जिससे अनारक्षित (सामान्य) वर्ग के पद मारे जा रहे थे। अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए तो आरक्षण के अनुसार 36 प्रतिशत रखे गए, मगर अनारक्षित वर्ग के पदों पर भी इन्हें मेरिट के आधार पर आने का अवसर दिया गया। इसे लेकर ही पूर्व के नियम में आपत्ति थी।

नए नियम में कुछ सुधार किया गया

हालांकि, नए नियम में कुछ सुधार किया गया। मसलन, कोई अनारक्षित श्रेणी में आरक्षित का अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नति पाता है तो भी उसे आरक्षित श्रेणी में ही गिना जाएगा और अगली बार जब पदोन्नति होगी, तब उस श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। पदोन्नति नियम अनुसार अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित रखे जाने वाले पदों की गणना के साथ ही प्रत्येक संवर्ग में प्रतिनिधित्व प्रशासनिक दक्षता के आधार पर निर्धारित करने का प्रविधान रखा गया है।

पदोन्नति समिति की बैठक से पहले होगी

आरक्षित वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों के पदों की गणना विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से पहले होगी। यदि किसी संवर्ग में आरक्षण कम करने का निर्णय लिया जाता है तो ऐसे में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के अनुमोदन से ही यह किया जा सकेगा। एक बार जो आरक्षण निर्धारित हो जाएगा, वह पांच वर्ष तक रहेगा। पदोन्नति के लिए प्रत्येक संवर्ग में पद कैसे निर्धारित किए जाने हैं, इसे लेकर सामान्य प्रशासन विभाग 29 जून को सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव के साथ बैठक करेगा।

नई बेंच गठित होने के बाद ही होगा निर्णय

सूत्रों का कहना है कि हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान नए नियम पर कभी स्थगन नहीं दिया गया। मौखिक तौर पर यह अवश्य कहा गया था कि जब तक सुनवाई चल रही है, तब तक आगे न बढ़ा जाए। चूंकि सुनवाई हो चुकी है और निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है। पुरानी बेंच में शामिल न्यायाधीश स्थानांतरित हो चुके हैं, इसलिए नई बेंच गठित होगी। वह अंतिम सुनवाई करेगी और फिर निर्णय सुनाया जाएगा। इस बीच सरकार प्रक्रिया पूरी करके रखना चाहती है, ताकि जब निर्णय आए तो प्रक्रिया के नाम पर पदोन्नति में देरी न हो।



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