नई दिल्ली। स्ट्रोक किसी भी व्यक्ति की जिंदगी को पूरी तरह बदल सकता है। इसका असर मरीज के साथ-साथ उसके पूरे परिवार और देखभाल करने वालों पर भी पड़ता है। इसे अक्सर ब्रेन अटैक कहा जाता है।
स्ट्रोक तब होता है, जब दिमाग के किसी हिस्से में ब्लड सप्लाई पूरी तरह पहुंच न पाए या दिमाग की कोई नस फट जाए। वैसे तो ये किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा और भी बढ़ जाता है। बुजुर्गों में इसका खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि उम्र के साथ ब्लड वेसल्स कमजोर होने लगती हैं।
भारत में स्ट्रेक विकलांगता का पांचवा सबसे बड़ा कारण है। इसके बढ़ते बोझ और परिवार व हेल्थ केयर सिस्टम पर इसके पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए इसके रिस्क फैक्टर्स को समझना जरूरी है।
स्ट्रोक के कॉमन रिस्क फैक्टर्स
स्ट्रोक के रिस्क फैक्टर्स में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, स्मोकिंग और फिजिकल एक्टिविटीज की कमी जैसी हेल्थ कंडीशन शामिल हैं। ये काफी कॉमन रिस्क फैक्टर्स हैं और इनके बारे में अक्सर बात भी होती रहती है। हालांकि, कुछ रिस्क फैक्टर्स ऐसे भी है, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता।
ये भी बन सकते हैं स्ट्रोक की वजह
इन्फेक्शन- स्ट्रोक का खतरा सिर्फ कार्डियोवैस्कुलर वजहों से नहीं होता। हाल के कुछ सालों में सामने आए सबूत बताते हैं कि कुछ इन्फेक्शन्स भी स्ट्रोक के खतरे से जुड़े हो सकते हैं। इनमें इन्फ्लूएंजा और शिंगल्स जैसे वायरल इन्फेक्शन शामिल हैं।
इसके पीछे ये कारण हो सकता है कि वायरल इन्फेक्शन की वजह से शरीर में सूजन और ब्लड क्लॉट्स बनने की प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है, जिससे स्ट्रोक और दूसरे कार्डियोवैस्कुलर कॉम्प्लिकेशन का खतरा बढ़ सकता है।
शिंगल्स और स्ट्रोक का कनेक्शन
शिंगल्स एक ऐसी बीमारी है, जो वेरीसेला-जोस्टर वायरस के दोबारा एक्टिव होने की वजह से होता है। इसी वायरस की वजह से चिकनपॉक्स होता है। जब किसी मरीज का चिकनपॉक्स ठीक हो जाता है, तो वायरस डोरमैंट स्टेट में चला जाता है और कमजोर इम्यून सिस्टम होने पर बाद में फिर से एक्टिव होकर शिंगल्स का कारण बन सकता है।
अक्सर लोग शिंगल्स को सिर्फ एक दर्दनाक रैश समझते हैं, लेकिन इसका असर त्वचा से कहीं आगे तक हो सकता है। ये वायरस दिमाग की छोटी और बड़ी, दोनों ब्लड वेसल्स को प्रभावित कर सकता है। इससे वैस्कुलर इन्फ्लेमेशन होती है, जो स्ट्रोक और दूसरे सेरेब्रोवैस्कुलर कॉम्प्लिकेशन के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है।
50 से ज्यादा उम्र के वयस्क क्या कर सकते हैं?
स्ट्रोक के कॉमन रिस्क फैक्टर्स के साथ-साथ इन्फेक्शन्स से भी सावधानी जरूरी है। इन्फेक्शन से बचने के लिए भीड़-भाड़ वाली जगह पर मास्क पहनें, लक्षण दिखने पर समय पर जांच करवाएं और मेडिकल हेल्प लें। इसके अलावा, अपने डॉक्टर से सही लाइफस्टाइल, डाइट और प्रिवेंटिव वैक्सीन्स के बारे में समझें।