विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) 2027 सीजन का ऑक्शन 28 अक्टूबर को कोच्चि में होगा। इसमें 146 खिलाड़ी हिस्सा लेंगी, जिनमें 5 टीमों को मिलाकर 27 खिलाड़ियों की जगह खाली है।

इंग्लैंड की बल्लेबाज सोफिया डंकली और ऑस्ट्रेलिया की कप्तान सोफी मोलिन्यू ने बेस प्राइस 50 लाख रुपए रखी है। बेस प्राइस वह शुरुआती कीमत होती है, जहां से किसी खिलाड़ी के लिए बोली शुरू हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि खिलाड़ी को 50 लाख रुपए मिलना तय है। अगर कोई टीम बोली नहीं लगाती, तो खिलाड़ी अनसोल्ड भी रह सकती है।

ऑक्शन में भारतीय खिलाड़ियों की संख्या सबसे ज्यादा है। इनमें 119 भारतीय और 27 विदेशी हैं। लेकिन टीमों को भारतीय खिलाड़ियों के लिए 20 और विदेशी खिलाड़ियों के लिए सिर्फ 7 जगह भरनी है।


1. ऑक्शन कैसे होता है? बेस प्राइस और पर्स का मतलब समझिए

ऑक्शन में टीमें उन खिलाड़ियों के लिए बोली लगाती हैं, जिन्हें वे अपने साथ जोड़ना चाहती हैं। हर खिलाड़ी अपनी एक शुरुआती कीमत तय करती है, जिसे बेस प्राइस कहते हैं। इसके बाद टीमें बोली बढ़ाती हैं और सबसे ऊंची बोली लगाने वाली टीम खिलाड़ी को खरीद लेती है।

लेकिन हर टीम के पास खर्च करने के लिए सीमित पैसा होता है। इसे पर्स कहते हैं। टीम जितना पैसा पहले खर्च कर चुकी है, उसके बाद उतना ही पैसा बचता है, जिसे वह ऑक्शन में इस्तेमाल कर सकती है।

दूसरी सीमा खिलाड़ियों की संख्या है। किसी टीम के पास जितनी खाली जगह है, वह उसी हिसाब से खिलाड़ी खरीद सकती है।


2. किस खिलाड़ी ने कितनी बेस प्राइस रखी?

सबसे ऊंची बेस प्राइस रखने वाली डंकली और मोलिन्यू हैं। मोलिन्यू पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेल चुकी हैं। 2024 में टीम के खिताबी अभियान के दौरान उन्होंने 10 मैचों में 12 विकेट लिए थे। 2025 में वे घुटने की चोट से नहीं खेल सकीं।

डंकली 2023 में गुजरात जायंट्स के लिए खेली थीं। उन्होंने 2024 सीजन के लिए अपना नाम नहीं दिया था और 2025 के ऑक्शन में अनसोल्ड रही थीं।


3. कैप्ड और अनकैप्ड खिलाड़ी कौन होती हैं?

ऑक्शन की खबरों में कैप्ड और अनकैप्ड शब्द बार-बार आते हैं। इसका आसान मतलब है-

  • कैप्ड खिलाड़ी: जो अपने देश की अंतरराष्ट्रीय टीम के लिए खेल चुकी हो।

  • अनकैप्ड खिलाड़ी: जिसने अभी तक अपने देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला हो।

इस ऑक्शन में 119 भारतीय खिलाड़ियों में 22 कैप्ड और 97 अनकैप्ड हैं। विदेशी खिलाड़ियों में 14 कैप्ड और 13 अनकैप्ड खिलाड़ी हैं। विदेशी समूह में एसोसिएट देशों की 6 खिलाड़ी भी शामिल हैं। एसोसिएट देश वे क्रिकेट बोर्ड हैं, जो टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलते।

4. यूपी वॉरियर्स के पास 8 स्लॉट

  • यूपी वॉरियर्स 5 भारतीय और 3 विदेशी खिलाड़ियों के लिए बोली लगा सकती है। इसलिए उसके पास सबसे ज्यादा 8 स्लॉट खाली हैं।

  • टीम ने जिन खिलाड़ियों को रिलीज किया, उनमें डिएंड्रा डॉटिन, क्लो ट्रायन और किरण नवगिरे शामिल हैं। यूपी ने तारा नॉरिस को मुंबई इंडियंस के साथ 10 लाख रुपए के ट्रेड में भी भेजा। ट्रेड का मतलब है कि ऑक्शन के बजाय दो फ्रेंचाइजी आपसी सहमति से खिलाड़ी को एक टीम से दूसरी टीम में भेजती हैं।

  • मुंबई इंडियंस के पास 6 खाली स्लॉट हैं, लेकिन सभी भारतीय खिलाड़ियों के लिए हैं। गुजरात जायंट्स ने 15 खिलाड़ियों को रिटेन किया और 4 को रिलीज किया। इसलिए उसके पास सिर्फ तीन स्लॉट खाली हैं।

  • रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 4 खिलाड़ियों को रिलीज किया, जिनमें ग्रेस हैरिस शामिल हैं। टीम के पास पांच स्लॉट खाली हैं। दिल्ली कैपिटल्स ने छह खिलाड़ियों को रिलीज किया और पांच जगह भरनी हैं।


5. इंग्लैंड की कई खिलाड़ी ऑक्शन में क्यों नहीं आईं?

ऑक्शन में इंग्लैंड की सिर्फ दो खिलाड़ियों सोफिया डंकली और किरा चैथली ने नाम दर्ज कराया है। चैथली की बेस प्राइस 10 लाख रुपए है। डैनी वायट-हॉज, एलिस कैप्सी, डैनी गिब्सन, लॉरेन फिलर और लिन्से स्मिथ जैसी कई खिलाड़ी इस बार ऑक्शन में शामिल नहीं हुई हैं। इसके पीछे दो अहम वजहें बताई गई हैं-

1. इंटरनेशनल क्रिकेट का बिजी शेड्यूल- इंग्लैंड की टीम फरवरी की शुरुआत में श्रीलंका के खिलाफ तीन टी-20 मैच खेल सकती है। यह कार्यक्रम WPL के आखिरी सप्ताह से टकरा सकता है।

2. कमाई का अंतर- इंग्लैंड की कई खिलाड़ी द हंड्रेड जैसे टूर्नामेंट में ज्यादा पैसे कमाती हैं। पिछले साल द हंड्रेड में कुछ खिलाड़ियों की कमाई 1.90 लाख पाउंड तक थी, जो भारतीय रुपयों में 2 करोड़ 40 लाख के बराबर है। वहीं WPL में सबसे ऊंची बेस प्राइस 50 लाख रुपए है।