तारों के जाल से मिलेगी मुक्ति! शुरू होने वाली है स्टारलिंक की इंटरनेट सर्विस, कितना आएगा खर्च?
Updated on
24-05-2025 02:03 PM
नई दिल्ली: सैटकॉम कंपनियां जल्द ही भारत में अपनी सर्विस शुरू कर सकती हैं। इनमें एलन मस्क की कंपनी Starlink भी शामिल हैं। शुरुआती ऑफर में अनलिमिटेड डेटा प्लान ₹840 (करीब $10) प्रति महीने से भी कम में मिल सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियां धीरे-धीरे अपने कस्टमर बढ़ाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य मिड-टू-लॉन्ग टर्म में 1 करोड़ कस्टमर बनाना है। इससे स्पेक्ट्रम की ऊंची लागत को कम करने में मदद मिलेगी। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने शहरों में प्रति यूजर ₹500 प्रति महीने का एक्स्ट्रा चार्ज लगाने का सुझाव दिया है। इससे सैटेलाइट कम्युनिकेशन के लिए स्पेक्ट्रम जमीनी सर्विस से महंगा हो जाएगा।
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि Starlink जैसी बड़ी कंपनी के लिए यह कोई बड़ी रुकावट नहीं होगी। कंपनी भारत के शहरों में आसानी से मुकाबला कर पाएगी। ग्लोबल टीएमटी कंसल्टिंग फर्म एनालिसिस मेसन के पार्टनर अश्विंदर सेठी ने कहा कि स्पेक्ट्रम चार्ज और लाइसेंस फीस ज्यादा होने के बावजूद सैटकॉम कंपनियां भारत में कम कीमत पर सर्विस शुरू कर सकती हैं। यह कीमत लगभग $10 से कम हो सकती है। इससे उन्हें ज्यादा कस्टमर मिलेंगे और उनकी फिक्स्ड कॉस्ट कम हो जाएगी।
ट्राई का सुझाव
इस बारे में ET ने Starlink और उसकी पैरेंट कंपनी SpaceX से बात करने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। टेलीकॉम सेक्टर के रेगुलेटर ने सुझाव दिया है कि सैटकॉम कंपनियों को अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का 4% देना होगा। इसके साथ ही, उन्हें ₹3,500 प्रति MHz स्पेक्ट्रम ब्लॉक का मिनिमम सालाना चार्ज भी देना होगा। कमर्शियल सर्विस देने के लिए सैटकॉम कंपनियों को 8% लाइसेंस फीस भी देनी होगी। इन सुझावों को सरकार की मंजूरी मिलना बाकी है।
एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा है कि सैटेलाइट की संख्या कम होने से स्टारलिंक के लिए भारत में मार्केट शेयर बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा टेलीकॉम मार्केट है। IIFL रिसर्च के अनुसार Starlink के पास अभी 7,000 सैटेलाइट हैं और उसके लगभग 40 लाख (4 मिलियन) कस्टमर हैं। अगर स्टारलिंक 18,000 सैटेलाइट तक पहुंच जाती है, तो भी वह फाइनेंशियल ईयर 2030 तक भारत में सिर्फ 15 लाख (1.5 मिलियन) कस्टमर को ही सर्विस दे पाएगी।
सैट वर्सेज होम ब्रॉडबैंड
IIFL रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा कि सैटेलाइट की संख्या कम होने से कस्टमर बढ़ाने में दिक्कत आ सकती है। कम कीमत का फायदा भी कम हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Starlink ने सैटेलाइट की कमी के कारण अमेरिका और अफ्रीका के कुछ इलाकों में कस्टमर जोड़ना बंद कर दिया था। IIFL का मानना है कि भारत को कवर करने वाले सैटेलाइट की संख्या ग्लोबल सैटेलाइट की संख्या का सिर्फ 0.7-0.8% होगी। यह भारत के एरिया के हिसाब से है। जेएम फाइनेंशियल ने बताया कि अभी सैटकॉम ब्रॉडबैंड की कीमत होम ब्रॉडबैंड से 7-18 गुना ज्यादा है।
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