बिहार में क्या अकेले चुनाव लड़ेंगे जीतन राम मांझी? 'हम के लिए करो या मरो की लड़ाई' से NDA की बढ़ी धड़कनें

Updated on 15-09-2025 12:42 PM
पटना: बिहार की सियासत में चुनावी हलचल तेज हो गई है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने आगामी विधानसभा चुनाव को अपनी पार्टी के लिए 'करो या मरो' की लड़ाई करार दिया है। पार्टी गठन के दस साल बाद भी मान्यता प्राप्त दर्जा न मिलने से नाराज मांझी ने साफ कहा है कि इस बार वे अपनी पूरी ताकत चुनावी रणभूमि में झोंक देंगे।


मान्यता पाने के लिए 'हम' के पास दो रास्ते: मांझी

जीतन राम मांझी ने कहा कि किसी भी दल को मान्यता प्राप्त पार्टी बनने के लिए दो विकल्प रहते हैं, एक यह कि वो विधानसभा में कम से कम आठ सीटें जीते। दूसरा- कुल मतों का छह प्रतिशत वोट हासिल करे। उन्होंने कहा कि हम पार्टी भी अब इन्हीं लक्ष्यों की ओर बढ़ रही है और इसके लिए दो संभावित रास्ते तय किए गए हैं।
मांझी के अनुसार, पहला रास्ता है एनडीए गठबंधन का हिस्सा बनकर कम से कम 15 सीटों पर चुनाव लड़ा जाए और उनमें से कम से कम 8 सीटों पर जीत दर्ज की जाए। दूसरा विकल्प है कि राज्य की 50 से 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाएं और हर क्षेत्र में औसतन 10 हजार से अधिक वोट हासिल किए जाएं।

पार्टी नेतृत्व करेगा अंतिम फैसला: मांझी

मांझी ने कहा कि अगर पार्टी नेतृत्व उन्हें रणनीतिक फैसले लेने का अधिकार देता है, तो वे राजनीतिक समीकरण को देखते हुए जरूरी कदम उठाएंगे। उन्होंने याद दिलाया कि 2015 में नीतीश कुमार की वापसी के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने हम पार्टी की स्थापना की थी।
गौरतलब है कि मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन इस समय हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री हैं। उनकी पत्नी दीपा और सास ज्योति देवी भी विधायक हैं। इसके बावजूद पार्टी अब तक गैर-मान्यता प्राप्त दल की श्रेणी में बनी हुई है।

मान्यता न मिलना अपमानजनक: मांझी

मांझी ने कहा, 'पार्टी गठन को एक दशक पूरा हो गया, लेकिन आज भी हम सिर्फ पंजीकृत दल हैं, मान्यता प्राप्त दर्जा नहीं मिला। यह मेरे और पार्टी दोनों के लिए अपमानजनक है। इसलिए इस बार विधानसभा चुनाव हमारे लिए करो या मरो की लड़ाई होगी।' उन्होंने आगे जोड़ा कि बिहार की राजनीति में हम पार्टी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने के लिए हर संभव प्रयास करेगी और यह साबित करेगी कि वह राज्य की राजनीति में एक निर्णायक शक्ति बन सकती है।

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