भारत के बंदरगाहों पर जहाज लाने से क्यों डरते हैं भारतीय कैप्टन, वजह जान कर आंखें खुली रह जाएंगी
Updated on
11-09-2025 02:30 PM
नई दिल्ली: भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुधारने के लिए एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'काशी करवट' कर रहे हैं। दूसरी तरफ भारत सरकार के कुछ अधिकारी कुछ इस तरह का काम कर रहे हैं कि दुनिया भर में यहां का नाम खराब हो रहा है। हम बात कर रहे हैं शिपिंग सेक्टर की। जी हां, भारत के बंदरगाहों, खास कर सरकारी बंदरगाहों पर इंटरनेशनल रूट पर चलने वाले शिप से वसूली की खबर अब सोशल मीडिया पर भी चलने लगी है।
क्या कहते हैं कैप्टन
नवभारत टाइम्स ने इस बारे में कई मास्टर मैरिनर (Master Mariner), जिसे आम भाषा में कैप्टन (Caption) कहते हैं, से बात की। सबने मुक्त कंठ से इस आरोप की पुष्टि की। उनका कहना है कि भारतीय बंदरगाहों पर कस्टम विभाग के अधिकारी बिल्कुल 'डकैत' की तरह व्यवहार करते हैं। वे जहाज पर सिर्फ विभागीय कर्मचारियों के साथ ही नहीं आएंगे बल्कि अपने साथ 'रेमेजिंग ग्रुप' के साथ आते हैं। वे स्टोर में जाएंगे और मार्लोबोरो जैसे कीमती सिगरेट की 20-25 कार्टन उठा लेंगे। वे सस्ते सिगरेट से मानते नहीं उन्हें तो 25 डॉलर से लेकर 50 डॉलर प्रति डिब्बी वाला सिगरेट चाहिए। इसके साथ ही उन्हें महंगी विदेशी शराब भी चाहिए। किस्सा यहीं अंत नहीं होता, उनके साथ चल रहे 'चमचेनुमा व्यक्ति' फिर नीचे प्रोविजन रूम में जाएंगे और वहां से बटर, ओलिव ऑयल, कॉफी, टीबैग का कार्टन, जैम, न्यूट्रीला जैसे प्रोडक्ट का कार्टन उठा लेंगे। यहां तक कि वे फ्रोजन चिकन और कोल्ड ड्रिंक की बोतल का कार्टन भी उठा लेते हैं।
डॉलर भी चाहिए?
एक कैप्टन का कहना है कि ऐसा सिर्फ भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश के बंदरगाहों पर दिखता है। दुनिया के अन्य बंदरगाहों पर ऐसा नहीं होता है। अन्य देशों में तो वे सिगरेट के कार्टन को ही गिफ्ट के रूप में स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन भारत में तो कस्टम विभाग के लोग जहाज का कस्टम क्लियरेंस जल्दी देने के लिए सीधे-सीधे डॉलर मांगते हैं। 200 से 500 डॉलर तो आम रेट है। कोई-कोई अधिकारी तो 1,000 डॉलर के लिए भी मुंह खोल देता है। जिसने पैसे नहीं दिए, उसके जहाज की पूरी चेकिंग होगी। जो डिक्लयेर किया गया है, उसके मुताबिक सामानों को मिलाया जाएगा। दवा, नारकोटिक्स, लिकर, सिगरेट, खाने-पीने का सामान, टेलीविजन से लेकर जूते-कपड़ों तक का मिलान किया जाएगा। यदि कैप्टन ने किसी सामान का 100 पीस डिक्लेयर किया और 99 पाया गया तो फिर एक्सप्लानेशन दीजिए। इस चक्कर में छह-आठ घंटे निकल जाएंगे। इसलिए कैप्टन यह समय बचाने के लिए डॉलर के रूप में सुविधा शुल्क चुका देते हैं।
भारतीय बंदरगाह पर जहाजी आना नहीं चाहते
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गणेश (@ggganeshh) नाम के हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया है जिसका शीर्षक है भारत गरीब देश है या अमीर? इसमें लिखा गया है "जहाजी कहते हैं कि जैसे ही जहाज बंदरगाह पर पहुंचता है, बाबू अंदर आते हैं फूड, लिकर और सिगरेट आदि पर टूट पड़ते हैं।" इस वीडियो में जहाजी कहते हैं कि वह भारत के किसी भी बंदरगाह पर आना नहीं चाहते। क्योंकि यहां पोर्ट पर सफेद वर्दी में आने वाले अधिकारी बढ़िया व्यवहार नहीं करते हैं।
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