कौन हैं जज अमोघ कलोती जिनके पास है टाटा विवाद की चाबी? जान लीजिए उनके बारे में सबकुछ
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18-09-2026 12:32 PM
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप में कोहराम मचा हुआ है। 125 अरब डॉलर के इस ग्रुप पर कंट्रोल को लेकर ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस और उसके सबसे बड़े शेयरहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स आमने-सामने हैं। टाटा ग्रुप के इस विवाद की चाबी महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर अमोघ कलोती के पास है। कलोती ने ही मई 2026 में वेणु श्रीनिवासन की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सर रतन टाटा ट्रस्ट को बोर्ड मीटिंग करने से रोका और उन ट्रस्टों के कामकाज की जांच का आदेश दिया। टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में 66.4% हिस्सेदारी है।टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमोघ कलोती कानून और न्याय विभाग के तहत काम करते हैं। महाराष्ट्र के कानूनी हलकों के बाहर शायद ही किसी को उनके बारे में पता था। वह फरवरी 2024 में महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर नियुक्त किए गए और लो प्रोफाइल वाले जिला जज अब देश की सबसे हाई-प्रोफाइल कॉर्पोरेट लड़ाई में शामिल हो गए हैं।शांत स्वभाव और नियमों में सख्ती
पेशे से वकील और अब नौकरशाह के तौर पर काम कर रहे 50 वर्षीय कलोती अमरावती के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई अमरावती से पूरी की और जिला एवं सत्र न्यायालय में वकील के तौर पर प्रैक्टिस की। वकील और जज दोनों ही भूमिकाओं में उन्हें शांत स्वभाव का, सोच-समझकर बोलने वाला और नियमों का सख्ती से पालन करने वाला माना जाता था।कलोती को 2013 में जिला और सहायक सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्होंने बुलढाणा में जिला न्यायाधीश, मुंबई में सिटी सिविल और सत्र न्यायालय और छत्रपति संभाजीनगर में सत्र न्यायालय में काम किया। उन्हें वाशिम में प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश के रूप में तैनात किया गया था। कलोती ने TOI के कॉल और टेक्स्ट संदेशों का जवाब नहीं दिया।क्या हैं उनके अधिकार?
चैरिटी कमिश्नर महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट, 1950 के तहत स्थापित एक अर्ध-न्यायिक प्राधिकरण है और मुंबई में सार्वजनिक ट्रस्टों के प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पद जिला न्यायाधीश के बराबर होता है। उनकी शक्तियों में ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करना, वित्तीय गड़बड़ी की जांच करना, ट्रस्टियों को सस्पेंड करना और हॉस्पिटल चैरिटी बेड का मैनेजमेंट शामिल है।
टाटा से जुड़े मामले
कलोती के पास टाटा से जुड़े तीन मामले हैं। इनमें से एक पर उन्होंने फैसला सुना दिया है। 2 सितंबर के फैसले में उन्होंने 1989 में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से नोएल टाटा के पिता नवल टाटा को शेयरों के ट्रांसफर को कानूनी रूप से सही माना। उनके पास दो और शिकायतें पेंडिंग हैं।
इसमें एक वेणु श्रीनिवासन की सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के खिलाफ है। यह ट्रस्ट के बोर्ड में स्थायी ट्रस्टियों की संख्या से जुड़ी है। दूसरी शिकायत मेहली मिस्त्री की है। उन्होंने खुद को हटाए जाने और ट्रस्ट के कामकाज के तरीकों की जांच की मांग की है।