ये क्या चक्कर है? प्राइवेट कंपनियों में हिस्सा खरीद रही पूंजीवादी अमेरिका की ट्रंप सरकार

Updated on 24-09-2025 03:24 PM
नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े पूंजीवादी देश अमेरिका में उल्टी गंगा बह रही है। डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं। अमेरिकी सरकार कई कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद चुकी है। इसी कड़ी में ट्रंप प्रशासन अब लिथियम अमेरिकाज में 10% तक की इक्विटी हिस्सेदारी लेना चाहती है। कंपनी एनर्जी डिपार्टमेंट से $2.26 अरब लोन के लिए बातचीत कर रही है। इसमें 10 फीसदी हिस्सेदारी की शर्त को शामिल किया जा सकता है। लिथियम अमेरिकाज और जनरल मोटर्स मिलकर Thacker Pass लिथियम प्रोजेक्ट बना रहे हैं। इसी प्रोजेक्ट के लिए कंपनी को सरकार से लोन चाहिए।

ट्रंप सरकार इससे पहले इंटेल, एमपी मटीरियल्स और दूसरी टेक और मिनरल कंपनियों में हिस्सेदारी ले चुकी है। सरकार उन उद्योगों को बढ़ावा देना चाहती है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। Thacker Pass प्रोजेक्ट वेस्टर्न हेमीस्फीयर में लिथियम का सबसे बड़ा स्रोत बनने वाली है। इससे 2028 उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसका निर्माण लगभग एक साल से चल रहा है। यह नेवादा और ओरेगन प्रांतों की सीमा पर स्थित है।

क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

Thacker Pass को डोमेस्टिक सप्लाई चेन बनाने में एक अहम कड़ी माना जा रहा है। लिथियम को वाइट गोल्ड भी कहा जाता है और अमेरिका लंबे समय से इसके उत्पादन को बढ़ावा देना चाहता है। लिथियम का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बैटरी बनाने में होता है। वाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इस प्रोजेक्ट का समर्थन करते हैं। वह इसे सफल बनाना चाहते हैं और टैक्सपेयर्स के साथ भी न्याय करना चाहते हैं। लेकिन मुफ्त का पैसा जैसी कोई चीज नहीं होती।
इस खबर आने के बाद लिथियम अमेरिकाज के शेयरों में लगभग 90% की तेजी आई। इस प्रोजेक्ट को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही पार्टियों का समर्थन है। दोनों पार्टियां चाहती हैं कि अमेरिका में महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन को बढ़ावा मिले और चीन पर निर्भरता कम हो। Thacker Pass के पहला चरण में सालाना 40,000 मीट्रिक टन बैटरी-क्वालिटी वाले लिथियम कार्बोनेट का उत्पादन करने की उम्मीद है। यह 800,000 ईवी के लिए पर्याप्त होगा। माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट अमेरिका को लिथियम उत्पादन में काफी आगे ले जा सकता है।

चीन का दबदबा

चीन ग्लोबल लिथियम सप्लाई चेन में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। वह सालाना 40,000 मीट्रिक टन से अधिक लिथियम का उत्पादन करता है। ऑस्ट्रेलिया और चिली के बाद चीन लिथियम का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। लेकिन चीन का प्रभाव रिफाइनिंग में कहीं अधिक है। वह दुनिया के 75% से अधिक लिथियम को बैटरी-ग्रेड सामग्री में प्रोसेस करता है। इससे पता चलता है कि चीन लिथियम के मामले में कितना ताकतवर है। $2.93 अरब के Thacker Pass प्रोजेक्ट को ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के अंत में मंजूरी दी थी।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 29 April 2026
नई दिल्‍ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। उसे न सिर्फ ऑयल एक्सपोर्ट करने में मुश्किल हो रही है, बल्कि…
 29 April 2026
नई दिल्‍ली: सोने और चांदी की कीमत में आज तेजी आई है। एमसीएक्स पर शुरुआती कारोबार में सोना 1,500 रुपये महंगा हो गया जबकि चांदी की कीमत में 1,000 रुपये की…
 29 April 2026
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी ग्रुप की 3034.90 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। इसके साथ…
 29 April 2026
नई दिल्ली: जोहो (Zoho) के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ( Sridhar Vembu ) की ओर से अमेरिका में बसे भारतीयों से वतन वापसी की अपील के बाद एक नई बहस छिड़ गई…
 29 April 2026
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पसंदीदा टैरिफ (आयात शुल्क) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद अब एक नया रास्ता निकाला है। ट्रंप प्रशासन अब…
 29 April 2026
नई दिल्ली: दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मार्केट कैप के हिसाब से देश की सबसे बड़ी कंपनी का सालाना प्रॉफिट 10 अरब…
 29 April 2026
 देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन की राह आसान करने वाला संगठन है नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI)। इसका कहना है कि जैसे-जैसे इसका उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों के…
 29 April 2026
नई दिल्ली: शेयर मार्केट में बुधवार को जबरदस्त तेजी आई। सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा उछल गया। वहीं बंधन बैंक के शेयर में 12 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखा गया।…
 28 April 2026
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट का असर भारत में सिर्फ कच्चे तेल या गैस तक सीमित नहीं है। खाड़ी देशों से आने वाली खाद यानी उर्वरक पर भी इसका असर दिखाई…
Advt.