हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम है... भारत और रूस ने निकाला ट्रंप के टैरिफ का तोड़!
Updated on
13-08-2025 02:37 PM
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है। भारतीय सामान पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। इसके अलावा रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर 25% का अतिरक्त टैरिफ लगाया गया है। इसके बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीदारी जारी रखने का फैसला किया है। हाल ही में सरकार और आरबीआई ने रुपये और रूस की करेंली रूबल में ट्रेड को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। आइए देखते हैं कि ये कदम क्या हैं और इनसे क्या बदलाव आएगा
रुपये-रूबल व्यापार में फिर से चर्चा क्यों हो रही है? कुछ दिनों पहले, अमेरिका ने भारत पर ज्यादा टैक्स लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद, 5 अगस्त को आरबीआई ने एक आदेश जारी किया। इस आदेश में कहा गया कि ऑथराइज्ड डीलर (AD) कैटगरी-1 बैंक केंद्रीय बैंक की अनुमति के बिना विदेशी बैंकों के लिए स्पेशल रुपये वोस्ट्रो अकाउंट (SRVA) खोल सकते हैं। इसके बाद हाल ही में आरबीआई ने इन पैसों को सरकारी सिक्योरिटीज और ट्रेजरी बिलों में आसानी से निवेश करने की अनुमति दे दी। पहले इस पर कुछ रोक थी जिसे हटा दिया गया है।
वोस्ट्रो अकाउंट क्या होता है? वोस्ट्रो अकाउंट एक ऐसा बैंक अकाउंट होता है जिसमें एक घरेलू बैंक, विदेशी बैंक के पैसों को अपनी लोकल करेंसी में रखता है। मसलन अगर कोई भारतीय बैंक किसी रूसी बैंक के लिए भारतीय रुपये में अकाउंट रखता है, तो उसे वोस्ट्रो अकाउंट कहते हैं। SRVA रूस के साथ तेल के व्यापार को आसान बनाता है। इससे लेन-देन सीधे रुपये में हो सकता है। इसमें डॉलर जैसी तीसरी करेंसी की जरूरत नहीं होती। आमतौर पर दूसरे वोस्ट्रो अकाउंट में ऐसा होता है कि डॉलर की जरूरत पड़ती है।
RBI के इस कदम से क्या मदद मिलेगी? इस बदलाव से अकाउंट खोलने की प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी। इन अकाउंट का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिल बनाने, पेमेंट करने और लेन-देन को पूरा करने के लिए किया जाता है। पहले बैंकों को SRVA खोलने से पहले आरबीआई से इजाजत लेनी होती थी। लेकिन अब वे खुद ही इसे खोल सकते हैं। इससे रुपये में होने वाले व्यापार के लेन-देन में तेजी आएगी।
SRVA रूस के साथ व्यापार को कैसे आसान बनाता है? रूस भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर है। रूस की तेल बेचने वाली कंपनियां अपने बैंकों के जरिए भारतीय रुपये को अपने SRVA में रख सकते हैं। यह अकाउंट भारतीय बैंकों में होता है। इससे तेल खरीदने वाली भारतीय कंपनियों शिपमेंट के लिए रुपये में आसानी से पेमेंट कर सकती हैं। इससे डॉलर में पेमेंट करने की जरूरत नहीं होती। इससे करेंसी बदलने का खर्च, एक्सचेंज रेट का खतरा और पेमेंट में होने वाली देरी कम हो जाती है।
क्या चुनौतियां हैं? भारत का रूस को निर्यात कम है और आयात ज्यादा है। तेल के आयात की वजह से व्यापार में भारत को घाटा होता है। इससे रूस के पास बहुत सारे भारतीय रुपये जमा हो जाते हैं जिससे लेन-देन में दिक्कत आती है। रूस की जिन कंपनियों पर अमेरिका ने पाबंदी नहीं लगाई है, वे रुपये के बजाय डॉलर में पेमेंट लेना पसंद करती हैं। रूबल की कीमत में बहुत उतार-चढ़ाव होता है। इसे कंट्रोल करना भी मुश्किल है। इसलिए रुपये के साथ सीधे एक्सचेंज करना मुश्किल होता है। अक्सर डॉलर के जरिए इसे बदलना पड़ता है, जिसमें बहुत खर्च आता है। पश्चिमी देशों ने रूस पर कई पाबंदियां लगाई हैं। इसमें रूसी बैंकों को SWIFT से बाहर करना भी शामिल है। इससे लेन-देन में दिक्कतें आती हैं और भारतीय बैंक पेमेंट क्लियर करते समय सावधानी बरतते हैं।
इन चुनौतियों से कैसे निपटा जा रहा है? इन चुनौतियों से निपटने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। इसमें रुपये-रूबल के लिए एक ऐसा एक्सचेंज रेट सिस्टम बनाना शामिल है जिससे डॉलर में बदलने का खर्च कम हो जाए। पेमेंट की पुष्टि करने के लिए सिस्टम बनाए जा रहे हैं। SWIFT की जगह दूसरे फाइनेंशियल मैसेजिंग नेटवर्क का इस्तेमाल करने पर भी विचार किया जा रहा है। आरबीआई ने रूसी कंपनियों को SRVA में जमा रुपये को भारतीय सरकारी सिक्योरिटीज, बॉन्ड, इक्विटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में निवेश करने की अनुमति दे दी है। इससे वे इन पैसों का इस्तेमाल सिर्फ व्यापार के लेन-देन के अलावा भी कर सकते हैं।यह भी प्रस्ताव है कि रुपये में जमा पैसों का इस्तेमाल तीसरे देशों को एक्सपोर्ट करने के लिए किया जाए। इससे रूसी सप्लायर उन रुपयों का इस्तेमाल भारत से सामान ऑर्डर करने के लिए कर सकते हैं। उन्हें दूसरे देशों से अलग-अलग करेंसी में पेमेंट मिल सकता है। UAE को शामिल करते हुए त्रिपक्षीय सेटलमेंट सिस्टम लागू करने पर भी बातचीत चल रही है।
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