इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि इसमें सबसे ज्यादा अभ्यास काम आता है। ऐसी जगह भक्ति का प्रयोग करके उपहास नहीं करना चाहिए। इसमें अभ्यास काम आएगा। अगर भगवान ने अभ्यास शब्द भगवान ने उपदेश नहीं किया होता तो हम मान लेते। अब हमने जीवन में कभी बंदूक नहीं पकड़ी और हम भजन उच्चारण करके सोचें कि लक्ष्य सीधा लगेगा तो कभी नहीं लगेगा। ये बहुत उपहास का विषय है कि हो रहा है क्रिकेट और हम कर रहे हैं हवन।



