
भोपाल। जर्जर भवन, दरकी हुई दीवार, बारिश में टपकती छत सहित अन्य दिक्कतें ग्रामीण क्षेत्र के पशु अस्पताल भवनों की पहचान है। कारण, कई अस्पताल भवन तो अंग्रेजों के जमाने के हैं। बाद में बने कुछ अस्पताल भी जर्जर हो गए। इनकी जगह अब नए अस्पताल भवन बनाने की तैयारी है।
इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र को 1400 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। अधिकारियों ने बताया कि केंद्र से अलग-अलग बजट शीर्ष में अलग-अलग अंशदान मिलने की आशा है, पर सभी में औसत 80 प्रतिशत तक राशि केंद्र से मिलने का अनुमान हैशेष 20 प्रतिशत के करीब राज्य सरकार को मिलानी होगी। पुनर्घनत्वीकरण योजना के अंतर्गत भी शहरी क्षेत्र के अस्पताल भवन बनाए जा रहे हैं। इसमें किसी शासकीय निर्माण एजेंसी को विभाग की जमीन देकर उसके बदले में निर्माण कराया जाता है। एजेंसी कुछ हिस्से का व्यावसायिक उपयोग करने की शर्त पर निर्माण करती है। बता दें कि कृषि के बाद सर्वाधिक जमीन गोपालन और पशुपालन विभाग के पास है।
प्रदेश के अधिकतर विकासखंडों में दो-दो पशु एंबुलेंस चलाई जाएंगी। इसके लिए केंद्र से 178 नई एंबुलेंस मिलने वाली हैं। राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इस वर्ष अंत तक नई एंबुलेंस चलाने की तैयारी है। केंद्र से इसके पहले भी 406 एंबुलेंस मिली थीं। प्रदेश में 313 ब्लॉक हैं, अभी कुछ ब्लॉक में दो और कुछ में एक एंबुलेंस चल रही हैं।
पशुपालन राज्य मंत्री लखन पटेल ने बताया कि पालतू और बेसहारा पशुओं की पहचान के लिए उन्हें अलग-अलग रंग का टैग लगाया जाएगा। इसके लिए भी केंद्र सरकार से राशि मिलेगी। टैग में कोड भी रहेगा, ताकि आसानी से उनकी पहचान की जा सके।