
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की आज व्हाइट हाउस में मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात का एजेंडा रूस-यूक्रेन जंग रोकना है।
इस बैठक में जेलेंस्की के अलावा यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन, नाटो महासचिव मार्क रूटे, ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी भी शामिल होंगे।
ट्रम्प और जेलेंस्की की 7 महीने में यह तीसरी मुलाकात होगी। पिछली बार जब जेलेंस्की अमेरिका गए थे तो वहां उनकी ट्रम्प से जमकर बहस हुई थी।
ट्रम्प ने जेलेंस्की से कहा था कि वे अमेरिकी मदद को लेकर शुक्रगुजार नहीं हैं। इस बहस की वजह से दोनों देशों के बीच मिनरल डील नहीं हो पाई थी।
माना जा रहा है कि इस बार ऐसी स्थिति न बने, इसलिए जेलेंस्की के साथ बाकी नेता भी इसमें शामिल हों रहे हैं। जेलेंस्की वॉशिंगटन पहुंच चुके हैं।
दोनों नेताओं में तीखी बयानबाजी के बाद यह बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई थी। इसके बाद दोनों 26 अप्रैल को रोम में पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार में मिले थे।
3 दिन पहले ट्रम्प ने पुतिन से मुलाकात की
ट्रम्प ने तीन दिन पहले ही यूक्रेन जंग को लेकर रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की थी। 3 घंटे मीटिंग के बाद भी यह बातचीत बेनतीजा रही थी।
ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि जंग रोकने के लिए यूक्रेन को रूस से जमीन की अदला-बदली करनी होगी। ऐसे में आज की मुलाकात में एक बार फिर से इस मुद्दे पर बात हो सकती है।
जेलेंस्की का तीन मुद्दों पर फोकस रहेगा
ट्रम्प के साथ मीटिंग में जेलेंस्की का मुख्य फोकस तीन मुद्दों पर रहेगा। 1- यूक्रेन में आम लोगों की हत्याएं बंद हो, 2- रूस पर और ज्यादा प्रतिबंध लगाए जाएं, 3- पहले स्थायी सीजफायर हो फिर सुरक्षा गारंटी मिले।
इसके अलावा जेलेंस्की यूक्रेन, अमेरिका और रूस के बीच त्रिपक्षीय बैठक का समर्थन कर चुके हैं। ट्रम्प के साथ इस मुलाकात में जेलेंस्की का जोर इस बात पर भी रहेगा कि किसी भी समझौते में यूक्रेन की सुरक्षा और संप्रभुता को प्राथमिकता दी जाए।
पुतिन का यूक्रेन के 20% हिस्से पर कब्जा छोड़ने से इनकार
रूस ने यूक्रेन के करीब 20% हिस्से, यानी लगभग 1 लाख 14 हजार 500 वर्ग किलोमीटर पर कब्जा कर रखा है। इसमें क्रीमिया, डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
रूस इन क्षेत्रों को अपनी सामरिक और ऐतिहासिक धरोहर मानता है और इन्हें छोड़ने को तैयार नहीं है।
पुतिन साफ कह चुके हैं कि यूक्रेन से शांति को लेकर बातचीत तभी हो सकती है जब यूक्रेन, रूस के कब्जाए गए क्षेत्रों से अपना दावा छोड़े और उन इलाकों को रूस के हिस्से के रूप में स्वीकारे।
जेलेंस्की की मांग- बिना शर्त सीजफायर हो
जेलेंस्की यूक्रेन की एक इंच जमीन भी रूस को नहीं देंगे। उनका मानना है कि अगर यूक्रेन अभी पीछे हटता है तो इससे देश की संप्रभुता और सुरक्षा कमजोर हो सकती है। साथ ही रूस को भविष्य में और ज्यादा हमले करने का मौका मिल सकता है।
ट्रम्प ने 13 अगस्त को यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के साथ वर्चुअल मीटिंग की। इस मीटिंग में ट्रम्प ने जंग खत्म करने के लिए जमीन अदला-बदली की बात कही थी।
इस पर जेलेंस्की ने कहा- यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता पर किसी भी तरह का फैसला हमारे संविधान और जनता की इच्छा को ध्यान में रखे बिना नहीं हो सकता।
हमारे सिद्धांत और हमारी जमीन से जुड़े फैसले नेताओं के स्तर पर ही होंगे, लेकिन इसमें यूक्रेन की भागीदारी जरूरी है। जेलेंस्की ने बिना किसी शर्त के युद्धविराम की मांग की।
रूस चाहता है नाटो में शामिल न हो यूक्रेन
पुतिन की जंग खत्म करने को लेकर एक शर्त ये भी है कि यूक्रेन नाटो में शामिल होने की अपनी मंशा छोड़ दे। अलास्का में पुतिन ने ट्रम्प को साफ कर दिया है कि संघर्ष खत्म करने के लिए उनकी सबसे अहम शर्त अभी भी कायम है।
पुतिन का कहना है कि नाटो को अब पूर्व की ओर विस्तार नहीं करना चाहिए। यानी, यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
पुतिन ने कहा कि अगर उन्हें इसका भरोसा हो जाए, तो वे बाकी मुद्दों पर समझौता करने को तैयार रहेंगे। रूस, यूक्रेन को अपने पश्चिमी सीमा पर एक बफर जोन के रूप में देखता है।