गई भैंस पानी में... विधायकों के बाद अफसरों पर भी कमीशनबाजी का आरोप, 10 फीसदी कमीशन मांगा, अब कार्रवाई तय!

Updated on 15-12-2025 01:26 PM
जयपुर: राजस्थान के तीन विधायकों के कमीशनबाजी में फंसे हैं और अब उनने के बाद अब अफसर भी लपेटे में आते नजर आ रहे हैं। 40 प्रतिशत में कमीशन की डील होने के बाद अफसरों से भी कार्य स्वीकृत कराने के लिए बातचीत की गई। आरोप है कि इस बातचीत के दौरान अफसरों ने भी अपना हिस्सा मांग लिया। नागौर जिले के मूंडवा के सीबीईओ कैलाश राम और करौली के डीईओ (प्रारंभिक) पर हिस्सा मांगने के आरोप हैं। स्टिंग करने वाले मीडिया समूह का दावा है कि इन दोनों अफसरों ने भी 5 से 10 प्रतिशत में डील फाइनल कर दी। सरकार अब इन अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। उधर, सोशल मीडिया पर इस मसले पर आम यूजर 'गई भैंस पानी में...' की तर्ज पर पूरे सिस्टम को कोसते नजर आ रहे हैं।

विधायकों के अनुशंसा पत्र पर अफसरों ने मांगा हिस्सा


स्टिंग के मुताबिक केवल विधायक ही कमीशन नहीं लेते, बल्कि अफसर भी 10 फीसदी हिस्सा लेते हैं। अपना हिस्सा मिलने के बाद ही अफसर वर्क ऑर्डर जारी करते हैं। खींवसर से विधायक रेवंतराम डांगा के अनुशंसा पत्र पर मूंडवा के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) कैलाश राम ने हिस्सा मांगा और हिंडौन विधायक अनीता जाटव के अनुशंसा पत्र पर करौली के जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) पुष्पेंद्र शर्मा ने अपना हिस्सा मांगा। स्टिंग ऑपरेशन के मुताबिक कैलाश राम ने 5 प्रतिशत और पुष्पेंद्र शर्मा ने 10 प्रतिशत हिस्सा लेकर वर्क ऑर्डर जारी करने पर सहमति जताई।

अब अफसरों पर कार्रवाई की बारी


स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तीनों विधायकों के विधायक फंड के खाते सीज कर उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति 15 दिन में मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए सदाचार समिति को जांच के आदेश दिए हैं। अब अफसरों के नाम सामने आने के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। खींवसर और मूंडवा के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी तथा करौली के डीईओ (प्रारंभिक) के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई होने की संभावना है।

स्वीकृत राशि में से सिर्फ 30 प्रतिशत का ही काम


स्टिंग ऑपरेशन करने वाले समूह का दावा है कि विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि में से केवल 30 प्रतिशत ही वास्तविक विकास कार्यों में खर्च हो पाता है। शेष 70 प्रतिशत राशि कमीशन और मुनाफे में बंट जाती है। इसमें 40 से 50 प्रतिशत कमीशन विधायक ले लेते हैं, 10 से 15 प्रतिशत अफसरों में बंट जाता है और करीब 20 प्रतिशत हिस्सा कार्य करने वाली फर्म के मुनाफे में चला जाता है। ऐसे में बचे हुए 30 प्रतिशत से ही विकास कार्य कराए जाते हैं।

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