बाजार बिगाड़ कंपनी, करोड़ों छोटे दुकानदारों पर असर... ऐमजॉन पर क्यों भड़के केंद्रीय मंत्री
Updated on
22-08-2024 02:20 PM
नई दिल्ली: कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने ई-कॉमर्स कंपनी ऐमजॉन की भारत में एक अरब डॉलर के निवेश की घोषणा पर बुधवार को सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कोई बड़ी सेवा नहीं कर रही है, बल्कि देश में हुए नुकसान की भरपाई कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत में ऐमजॉन को हुआ भारी घाटा असल में बाजार बिगाड़ने वाली बेहद कम कीमतों पर उत्पादों की बिक्री के तौर-तरीकों को बयां करता है। यह भारत के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि इसका असर करोड़ों रिटेल कारोबारियों पर पड़ता है।
गोयल ने यहां एक रिपोर्ट जारी करते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों के कारोबारी मॉडल को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, ‘जब ऐमजॉन भारत में एक अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा करती है तो हम जश्न मनाते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि ये अरबों डॉलर भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी सेवा या निवेश के लिए नहीं आ रहे हैं। कंपनी को उस साल अपने बही-खाते में एक अरब डॉलर का घाटा हुआ था और उन्हें उस घाटे की भरपाई करनी थी।’
किसे मिले 1000 करोड़ रुपये
वाणिज्य मंत्री ने कहा, ‘यह घाटा पेशेवरों को 1,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने की वजह से हुआ था। मुझे नहीं पता कि ये पेशेवर कौन हैं। मुझे यह जानना अच्छा लगेगा कि कौन से चार्टर्ड अकाउंटेंट, पेशेवर या वकील 1,000 करोड़ रुपये पाते हैं, जबतक कि आप उन्हें रोकने के लिए सभी बड़े वकीलों को भुगतान नहीं करते हैं जिससे कोई भी आपके खिलाफ मुकदमा न लड़ सके।’ उन्होंने अचरज जताते हुए कहा कि एक साल में 6,000 करोड़ रुपये का घाटा होने से क्या कीमतों को बेहद कम रखने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। यह सिर्फ एक ई-कॉमर्स मंच है और उन कंपनियों को सीधे ग्राहकों को बेचने (B2C) की अनुमति नहीं होती है। सरकार की नीति के मुताबिक, कोई भी ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म देश में सीधे ग्राहकों के साथ यानी B2C कारोबार नहीं कर सकता है। हालांकि, मंत्री ने आरोप लगाया कि ये कंपनियां केवल खुद को B2B दिखाने के लिए सभी व्यवसायों को एक इकाई के माध्यम से रीरूट करती हैं। उन्होंने कहा, ‘वे ऐसा कैसे कर रही हैं? क्या यह हमारे लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए।’
छोटे कारोबारियों को लेकर चिंता
गोयल ने कहा कि ई-कॉमर्स क्षेत्र की इकॉनमी में एक भूमिका है, लेकिन उनकी भूमिका के बारे में बेहद सावधानी और सतर्कता से सोचने की जरूरत है। ई-कॉमर्स कंपनियां छोटे खुदरा विक्रेताओं के अधिक मूल्य और हाई-मार्जिन वाले प्रोडक्ट को खत्म करती जा रही हैं, जबकि छोटी दुकानें इनके दम पर ही जिंदा रहती हैं। मंत्री ने देश में ऑनलाइन खुदरा कारोबार तेजी से बढ़ने पर परंपरागत दुकानों के साथ बड़ा सामाजिक व्यवधान पैदा होने की आशंका भी जताई। उन्होंने कहा कि हम ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं के बाजार में 27 प्रतिशत की सालाना हिस्सेदारी की दौड़ में देश के 10 करोड़ छोटे खुदरा विक्रेताओं के लिए बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न नहीं करना चाहते हैं।
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