'मैंने जो सबसे बड़ा सबक सीखा', 210 रुपये घंटे का आइडिया हुआ हिट, अब सालाना 2 करोड़ की कमाई

Updated on 13-07-2026 01:45 PM
नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र की वंदिता पुरोहित ने थोड़े ही समय में एक सफल बिजनेस खड़ा कर दिया है। साल 2020 में उन्‍होंने इस स्‍टार्टअप की नींव रखी थी। इसका नाम 'मौजी' (Mauji) है। यह एक बड़ा 'टाइम कैफे' है। यहां ग्राहक खाने-पीने के सामान के लिए नहीं, बल्कि कैफे में बिताए गए समय के हिसाब से पैसे चुकाते हैं। यह स्‍टार्टअप पुणे और नागपुर में अपनी पहचान बना चुका है। आज यह सालाना 2 करोड़ रुपये का रेवेन्यू जेनरेट कर रहा है। आइए, यहां वंदिता पुरोहित की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

इस तरह आया आइडिया

वंदिता पुरोहित ने नागपुर यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की है। वह एक सीरियल एंटरप्रेन्योर हैं। उन्होंने को-वर्किंग सेक्टर में काम करने के दौरान महसूस किया कि कई लोग कैफे में सिर्फ काम करने, पढ़ने या शांति से बैठने आते हैं। लेकिन, पारंपरिक कैफे में उन्हें जबरन कुछ न कुछ ऑर्डर करना पड़ता है। इसी गैप को भरने के लिए उन्होंने 2020 में अपने स्‍टार्टअप की शुरुआत की। यहां का मुख्य मॉडल 'पे-बाय-द-आवर' (प्रति घंटे भुगतान) है। इस 'टाइम कैफे' में 210 रुपये प्रति घंटे की शुरुआती कीमत पर ग्राहकों को हाई-स्पीड वाई-फाई, अनलिमिटेड कॉम्प्लीमेंट्री ड्रिंक्स और डीआईवाई स्‍नैक बार की सुविधा मिलती है। साथ ही यहां BYOF (ब्रिंग योर ओन फूड) की आजादी है यानी लोग बाहर से भी अपना खाना मंगा सकते हैं।

सफर में आईं कई अड़चनें

वंदिता ने सिर्फ 22 साल की उम्र में अपना उद्यम शुरू कर दिया था। 'मौजी' से पहले उन्होंने 2009 में आईटी कंसल्टिंग फर्म 'मिंट ट्री', 2015 में पुणे में एक को-वर्किंग स्पेस 'द दफ्तर' और बाद में ट्रैवल स्टार्टअप 'ट्रॉवर्क' और टिकाऊ फर्नीचर डिजाइन स्टूडियो 'कलापेंट्री' की सह-स्थापना की थी। इस सफर के दौरान उन्हें पार्टनर्स के साथ मतभेद, प्रोजेक्ट बंद होने और भारी वित्तीय नुकसान जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें अपना पुणे का ऑफिस खाली करना पड़ा। कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी। लेकिन, इन असफलताओं से सीख लेते हुए उन्होंने हार नहीं मानी। अपने अनुभवों को 'मौजी' को खड़ा करने में लगा दिया।

महामारी ने लिया इम्तिहान

वंदिता ने जब 'मौजी' को धरातल पर उतारने का फैसला किया, ठीक उसी समय देश में कोरोना महामारी ने दस्तक दे दी। उन्होंने 14 मार्च 2020 को पुणे में एक 6,000 वर्ग फीट के बंगले का पजेशन लिया था। लेकिन, कुछ ही दिनों के भीतर देशव्यापी लॉकडाउन लग गया। निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया। इस कठिन समय में अपने निवेशक और मकान मालिक के सहयोग से उन्होंने लॉकडाउन के दौरान चरणों में काम जारी रखा। खुद इंटीरियर डिजाइन किया। यह कैफे सितंबर 2020 में बनकर तैयार हुआ। पाबंदियों में ढील के बाद दिसंबर 2020 में इसे आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया। इसे शुरुआत में माउथ-पब्लिसिटी और सोशल मीडिया से बढ़ावा मिला।

बड़ा है आगे का टारगेट

आज इस कैफे के पुणे और नागपुर को मिलाकर कुल तीन सेंटर हैं। ये फ्रीलांसरों, क्रिएटर्स और वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए बेहतरीन कम्युनिटी हब बन चुके हैं। इसमें को-वर्किंग स्पेस के अलावा पॉडकास्ट और फोटोग्राफी के लिए स्टूडियो स्पेस, इवेंट स्पेस, लाइब्रेरी, मेकर स्पेस और एक आर्ट स्टोर भी शामिल है। यह स्‍टार्टअप 32 लोगों की टीम के साथ काम कर रहा है। सालाना यह लगभग 400 से 500 इवेंट्स आयोजित करता है। इसका सालाना रेवेन्यू 2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वंदिता का भविष्य का टारगेट 'थर्ड स्पेस हॉस्पिटैलिटी' के बैनर तले मौजी को देश के अन्य बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद में ले जाना और इसे 1000 करोड़ रुपये का वेंचर बनाना है।


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