हाथरस हादसे पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार:कहा- हाईकोर्ट जाएं, याचिका में जांच कमेटी की मांग की गई थी

Updated on 12-07-2024 01:26 PM

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हाथरस भगदड़ मामले पर दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि घटना परेशान करने वाली है, लेकिन ऐसे मामलों में हाइकोर्ट ही पर्याप्त है। कोर्ट ने याचिका लगाने वाले को हाईकोर्ट जाने को कहा।

इस जनहित याचिका में हादसे की जांच की मांग की गई थी। 2 जुलाई को दाखिल याचिका में कहा गया था- जांच के लिए पांच एक्सपर्ट की टीम गठित की जाए। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच हो।

याचिका CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला एवं जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच में सुनवाई के लिए आई। अधिवक्ता विशाल तिवारी ने दायर याचिका में घटना पर उत्तर प्रदेश सरकार को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने एवं लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग भी की थी।

इसमें सुप्रीम कोर्ट से राज्यों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी धार्मिक या अन्य आयोजन के आयोजन में जनता की सुरक्षा के लिए भगदड़ या अन्य घटनाओं को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करें।

123 लोगों की मौत हुई, बाबा को क्लीन चिट मिल गई

2 जुलाई को हाथरस के सिकंदराराऊ के फुलरई मुगलगढ़ी गांव में हुई भगदड़ में 123 लोगों की मौत हुई। इनमें 113 महिलाएं और 7 बच्चियां हैं। इस केस की तीन लेवल पर जांच हो रही है। पहली रिपोर्ट SDM ने हादसे के 24 घंटे बाद प्रशासन को सौंपी थी।

हाथरस केस में 7 दिन बाद 6 अफसर सस्पेंड हुए

हाथरस हादसे के 7 दिन बाद UP सरकार ने पहला एक्शन लिया। SDM, CO समेत 6 अफसरों को सस्पेंड कर दिया। सरकार ने SIT की रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई की। SIT ने सोमवार रात CM योगी को 900 पेज की रिपोर्ट सौंपी थी।

SIT रिपोर्ट के बाद सरकार ने 9 पॉइंट पर बयान जारी किया। इसमें आयोजकों और प्रशासनिक अधिकारियों को लापरवाह बताया गया। लेकिन कहीं भी भोले बाबा का जिक्र नहीं है। इस तरह जिला प्रशासन के बाद सरकार से भी भोले बाबा को क्लीन चिट मिल गई है। उसका नाम FIR में भी नहीं था।

जिन अफसरों को सस्पेंड किया गया, उनमें SDM रविंद्र कुमार, CO आनंद कुमार के अलावा इंस्पेक्टर आशीष कुमार, तहसीलदार सुशील कुमार और चौकी इंचार्ज कचौरा मनवीर सिंह और पारा चौकी इंचार्ज बृजेश पांडे शामिल हैं।

SIT ने 150 लोगों के बयान दर्ज किए
SIT ने रिपोर्ट में कहा- हादसे में साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसकी गहनता से जांच जरूरी है। हादसा आयोजकों की लापरवाही से हुआ। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने आयोजन को गंभीरता से नहीं लिया।

वरिष्ठ अफसरों को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। भीड़ के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। आयोजकों ने बिना पुलिस वैरिफिकेशन जिन लोगों को अपने साथ जोड़ा, उनसे अव्यवस्था फैली है। जांच के दौरान 150 अफसरों, कर्मचारी और पीड़ित परिवारों के बयान दर्ज किए गए।

आयोजकों ने तथ्यों को छिपाकर कार्यक्रम की अनुमति ली
SIT ने कहा- SDM, CO, तहसीलदार, इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज ने अपनी जिम्मेदारी में लापरवाही की। SDM ने बिना कार्यक्रम स्थल का मुआयना किए अनुमति दी। सीनियर अफसरों को भी जानकारी नहीं दी। घटनास्थल पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था भी नहीं थी।

रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि आयोजकों ने तथ्यों को छिपाकर कार्यक्रम की अनुमति ली। आयोजकों ने पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया। पुलिस को कार्यक्रम स्थल पर निरीक्षण से रोकने का प्रयास किया। हादसे के बाद आयोजक मंडल के सदस्य घटनास्थल से भाग गए।

CM ने हादसे के 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की थी। हालांकि SIT ने जांच पूरी करने में 6 दिन लगा दिए। आगरा जोन की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अनुपम कुलश्रेष्ठ SIT प्रमुख हैं।



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