शेयर मार्केट ऑल-टाइम हाई पर... लेकिन 4 जून को नहीं आई बीजेपी सरकार तो मच जाएगा हाहाकार!
Updated on
27-05-2024 06:19 PM
नई दिल्ली: शेयर मार्केट आज नए रेकॉर्ड पर पहुंच गया। फाइनेंशियल और मेटल शेयरों के दम पर बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 500 अंक से अधिक तेजी के साथ 75,949.30 अंक के ऑल-टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया। निफ्टी 50 इंडेक्स (Nifty50) भी 100 अंक से अधिक तेजी के साथ 23,092 अंक के नए रेकॉर्ड को छू गया। लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर लोकसभा चुनावों में बीजेपी की हार होती है तो स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म यूबीएस (UBS) के मुताबिक अगर चार जून के नतीजे में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए के पक्ष में नहीं रहते हैं तो इक्विटी वैल्यूएशन 2014 से पहले के स्तर तक जा सकता है।
यूबीएस सिक्योरिटीज के प्रेमल कामदार ने कहा कि अगर लोकसभा चुनावों के परिणाम उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहते हैं तो इसका शेयर बाजार में निगेटिव असर होगा। इसकी वजह यह है कि राजनीतिक अस्थितरता और पॉलिसी पैरालिसिस की आशंका के कारण बाजार की धारणा प्रभावित होगा और निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है। इससे नियर टर्म में फाइनेंशियल मार्केट्स में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। इक्विटी वैल्यूएशंस प्री-एनडीए स्तर तक गिर सकते हैं। ऐतिहासिक रूप से जब भी चुनाव रिजल्ट के कारण मार्केट में गिरावट आई है तो उसकी भरपाई के लिए मीडियम से लॉन्ग टर्म तक इंतजार करना पड़ता है। इसकी वजह यह है कि बाजार और कंपनियों को नई सरकार की नीतियों के अनुरूप ढलने में समय लगता है। ब्रोकरेज ने इन चुनावों में इन्वेस्टर्स के लिए चार सीनेरेयो बनाए हैं।
सीनेरियो 1
अगर बीजेपी इन चुनावों में अपनी सिंगल-पार्टी मैज्योरिटी बरकरार रखती है तो मार्केट्स को यह भरोसा रहेगा कि सरकार की नीतियां जारी रहेंगी। विनिवेश, लैंड बिल और यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बात आगे बढ़ सकती है। कुल मिलाकर फाइनेंशियल मार्केट का सेंटीमेंट पॉजिटिव बना रहेगा।
सीनिरेयो 2
अगर बीजेपी सिंगल पार्टी मैज्योरिटी हासिल में नाकाम रहती है और एनडीए के दूसरे घटक दलों के साथ मिलकर सरकार बनाती है तो नीतिगत स्थिरता को लेकर बाजार की भरोसा थोड़ा डगमगा सकता है। ऐसी स्थिति में गठबंधन के दूसरे दलों की तरफ से दबाव बढ़ सकता है लेकिन ओवरऑल मैक्रो स्टैबिलिटी बनी रह सकती है। इसका वित्तीय बाजारों पर मिलाजुला असर देखने को मिल सकता है।
सीनेरियो 3
अगर एनडीए बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाता है और किसी को बहुमत नहीं मिलता है तो बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। मजबूत सरकार नहीं होने पर फैसले लेने में देरी से सुधारों पर असर हो सकता है। इससे पॉलिसी पैरालिसिस की स्थिति पैदा हो सकती है जिसका फाइनेंशियल मार्केट्स पर नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
सीनेरियो 4
अगर INDIA गठबंधन की सरकार बनती है तो इससे बाजार में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसा होने पर नीतियों में बदलाव किया जा सकता है। यूबीएस ने कहा कि ऐसा होने पर एनडीए सरकार के कई सुधारों को पलटा जा सकता है। सरकार में बदलाव होने पर शेयर बाजार में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
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