- भारत इसे चीनी पीएल-15 मिसाइल के खिलाफ एक मजबूत हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल के तौर पर देख रहा है।
- इस डील के तहत रूस भारत को लगभग 300 R-37M अल्ट्रा-लॉन्ग-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें सप्लाई करेगा।
- कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक रूस इस मिसाइल की पहली खेप अगले 12 से 18 महीनों के भीतर भारतीय वायुसेना को सौंपना शुरू कर देगा।
- इन मिसाइलों को मुख्य रूप से भारतीय वायुसेना के रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले Su-30MKI फाइटर जेट्स पर तैनात किया जाएगा। Su-30MKI रूसी मूल का विमान है इसलिए R-37M को इसमें लगाना काफी आसान होगा।
- रूस ने भारत को इस मिसाइल की तकनीक ट्रांसफर करने और भारत में ही इसके पार्ट्स व मिसाइल बनाने का लाइसेंस देने की पेशकश की है।
चीनी पीएल-15 मिसाइल का जवाब कैसे है R-37M?
- भारत अपनी स्वदेशी मिसाइल 'अस्त्रा Mk-2 और Mk-3' पर काम कर रहा है। जब तक वे पूरी तरह तैयार नहीं हो जातीं तब तक के लिए R-37M एक मजबूत विकल्प बनेगा।
- पाकिस्तान के J-10C और चीनी जेट्स में लगी PL-15 मिसाइलों की रेंज काफी ज्यादा है। R-37M की 350 से 400 किमी की मारक क्षमता और Mach 6 की हाइपरसोनिक स्पीड इस पूरे रीजन में भारत को एकतरफा बढ़त दे देगी।
यह मिसाइल दुश्मन के लड़ाकू विमानों से ज्यादा उनके 'आसमान में उड़ने वाले राडार' (AWACS) और फ्यूल टैंकर्स को निशाना बनाएगी जिससे युद्ध के समय चीन-पाकिस्तान की हवाई आंखें अंधी हो जाएंगी। चूंकि भारतीय वायुसेना के पास पहले से सुखोई (Su-30MKI) हैं इसलिए रूसी मिसाइल का उसमें फिट होना गेम-चेंजर है।



