राजकुमार राव: रिश्ते में दोस्ती ढूंढ लें तो वो लंबा चलेंगे, हमें साथ में 15 साल हो चुके हैं

Updated on 12-05-2025 03:17 PM
राजकुमार राव अपनी जबरदस्त ऐक्टिंग की बदौलत फैंस के दिलों में राज कर रहे हैं। उन्होंने हमेशा अपने काम में विविधता रखी है, इसी वजह से उन्हें ढेर सारे कॉमिक किरदार निभाने के बावजूद कभी टाइपकास्ट होने का डर नहीं सताया। एक ओर जहां तमाम बॉलिवुड स्टार्स, साउथवालों के साथ मिलकर कोलैब कर रहे तो वहीं राजकुमार भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। अपने पार्टनर के साथ दोस्ती बनाए रखना क्यों जरूरी है। इसके अलावा, कई और ‘राज’ की बातें यहां पढ़िए।

अपने काम में हमेशा विविधता रखी है
राज ने अपने करियर में कई कॉमिक किरदार किए हैं। ऐसे में क्या उनके मन में कभी टाइपकास्ट होने का खयाल आया? इसके जवाब में ऐक्टर कहते हैं कि ऐसा कभी नहीं हुआ। पिछले साल मैंने श्रीकांत बोल्ला की बायॉपिक की थी। इस साल ‘मालिक’ आएगी, जो कि ऐक्शन पैक्ड फिल्म है। हमेशा मैंने अपने काम में विविधता रखी है। रही बात कॉमिडी की तो उसके लिए अच्छा लिखा होना बेहद जरूरी है। उसके बिना एक ऐक्टर को आप बोलें कि किसी सीन को फनी बना दो तो वो बहुत मुश्किल हो जाएगा। जब तक राइटिंग में कॉमिडी नहीं होगी, तब तक एक ऐक्टर के बस में नहीं है कि वो अकेले इतना कुछ कर सके।

मौका मिला तो साउथ इंडस्ट्री में काम करूंगा

तमाम बॉलिवुड स्टार्स, साउथ ऐक्टर, डायरेक्टर के साथ कोलैब कर रहे हैं। इस बातचीत में अभिनेता ने अपना इरादा भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि ईमानदारी से कहूं तो अभी तक मेरे पास ऐसा कोई मौका आया नहीं है। साउथ इंडस्ट्री में बहुत टैलंट है। बहुत सारे अच्छे-अच्छे ऐक्टर-डायरेक्टर हैं, जिसमें लिजो और मणिरत्नम जैसे नाम शामिल हैं। भ‌विष्य में अगर मुझे मौका मिलता है तो मैं जरूर उनके साथ काम करना चाहूंगा।
अपने पार्टनर के साथ दोस्ती बनाए रखना जरूरी है
मेरा और पत्रलेखा का दिल तो कई साल से जुड़ा हुआ है। हमारे रिश्ते के 15 साल पूरे होने वाले हैं। मैं यही मानता हूं कि समय कम मिले चलेगा लेकिन दिल हमेशा मिले रहना ज्यादा जरूरी है। अब हम एक अलग मुकाम पर पहुंच चुके हैं। काम में व्यस्त होने की वजह से कई बार हम एक महीने तक नहीं मिल पाते लेकिन हमें एक-दूसरे की अहमियत पता है। हर रिश्ते की शुरुआत प्रेम से होती है। कई बार यही शादी में बदल जाती है जैसा कि हमारे साथ हुआ। हालांकि, अपने पार्टनर के साथ दोस्ती बनाए रखना बहुत जरूरी है। जैसे हम कई बार दोस्तों के साथ होते हैं तो समय का पता नहीं चलता, उसी तरह अगर आप अपने रिश्ते में भी दोस्ती ढूंढ लें तो वो लंबा चल जाता है।

टाइटल का रोचक होना मायने रखता है

मुझे फिल्म के टाइटल नहीं, कहानी आकर्षित करती है। हालांकि, मेरी फिल्मों के टाइटल काफी रोचक होते हैं। यह बात एकदम सच है कि टाइटल का रोचक होना बहुत मायने रखता है क्योंकि वही पहली चीज होती है, जो ऑडियंस के पास जाती है। ऐसे में आपकी जिम्मेदारी बनती है कि मजेदार टाइटल सोचा जाए, जिससे वो ज्यादा से ज्यादा लोगों के जेहन में बस सके। बाकी मेरी लिए कहानी का मजबूत होना ज्यादा अहम है। अगर मुझे कहानी पसंद आ जाती है तो फिर मैं फिल्म करने के लिए हां कर देता हूं।

सरकारी नौकरी करता तो आईएएस बनता

राजकुमार राव की फिल्म भूल चूक माफ का एक डायलॉग है कि दो महीने में सरकारी नौकरी ले आओ। ऐसे में जब उनसे यह सवाल किया गया कि वाकई में अगर आपको सरकारी नौकरी मिलती तो आप क्या बनते? इस पर ऐक्टर ने कहा कि मुझे फिल्म शादी में जरूर आना में डीएम सत्येंद्र शुक्ला (आईएएस अफसर) बनकर बड़ा मजा आया था। हकीकत में, मुझे मौका मिलता तो आईएएस अफसर ही बनता। उनकी फिल्म की कहानी टाइम लूप पर आधारित है। ऐसे में जब राजकुमार से पूछा गया कि अगर आपको पीछे जाकर कुछ बदलने का मौका मिले तो क्या बदलना चाहेंगे। इस पर अभिनेता ने कहा कि मैं अपने पैरंट्स का लॉस बदलना चाहूंगा। इसके अलावा, मेरे फिल्म स्कूल (एफटीआईआई) के दिन हमेशा जेहन में रहते हैं। पत्रलेखा के साथ गुजारे ट्रैवलिंग के दिनों को मैं बहुत याद करता हूं। साथ ही हमारी शादी के जो तीन दिन के कार्यक्रम थे, उन्हें भी मैं कभी नहीं भूल सकता हूं। चाहता हूं कि वो दिन बार-बार लौटकर आएं।

अनुभव सिन्हा से इस बारे में बात करूंगा

फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा के साथ राज ने फिल्म भीड़ में काम किया था। हाल ही में फिल्ममेकर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि फिल्में दो तरह की बन रही हैं। एक बड़े पर्दे तो दूसरी ओटीटी के लिए। इस पर राज ने कहा कि वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं लेकिन इस मामले पर अभी मेरी उनके कोई बात नहीं हुई है। अभी उस पोस्ट में उन्होंने पूरी जानकारी भी नहीं दी है। वह इस बारे में आगे और भी बात करेंगे। उनसे बात करके ही बता पाऊंगा आखिर उन्होंने ऐसा क्या सोच कर लिखा है। हो सकता है कि कुछ ऐसा हुआ हो उनके साथ तो उन्हें लगा हो कि ऐसा लिखना चाहिए या हो सकता है कि उन्होंने किसी को स्पष्ट करने के लिए ऐसा किया हो।

गांव के लोग बहुत प्यारे, सीधे व सरल होते हैं

मैंने मालिक की शूटिंग के दौरान लखनऊ के आउटर एरिया में इस साल खूब समय बिताया है। इस वजह से मुझे गांव के कल्चर को अच्छे से समझने का मौका मिला। गांव के लोग बहुत प्यारे, सीधे और सरल होते हैं। यहां सरकार की तरफ से शूटिंग में बहुत सहूलियत मिलती है। इसी फिल्म के लिए उन्होंने अपना वजन बढ़ाया हुआ था। इस बार जब वह लखनऊ से रू-ब-रू हुए तो उनका वजन पहले से काफी कम नजर आया। राज ने बताया कि मैंने नापा तो नहीं लेकिन हां पांच-छह किलो वजन जरूर कम हुआ है।

सोशल मीडिया पर मैं जान बूझकर कम समय बिताता हूं। सुबह की पहली कॉफी के साथ 10 मिनट देख लेता हूं कि देश-दुनिया में क्या चल रहा है। इसकी जगह पर मैं फिल्म, वेब सीरीज और यूट्यूब पर कुछ अच्छे विडियोज देखना पसंद करता हूं।

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