
बैरागढ़ कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर मैजिक वाहन और सीवेज सक्शन मशीन से डीजल चोरी करने वालों पर एक दिन बाद भी निगम अफसर एफआईआर दर्ज नहीं करवा पाए हैं। करीब दो साल से इस स्तर पर डीजल चोरी पर लगाम लगी थी। पुराने डीजल टैंक प्रभारी के हटते ही ऐसे गिरोह एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है, क्योंकि डीजल की खपत 18-20 हजार लीटर प्रतिदिन की बढ़कर 20-21 हजार लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
निगम सूत्रों का कहना है कि ये गिरोह हाल ही में लागू हुए न तो फ्यूल ट्रैकिंग सिस्टम पर काम करने देना चाह रहे हैं और ही जीपीएस पर। यही वजह है कि अब तक निगम के 50 फीसदी वाहनों में जीपीएस लगे ही नहीं हैं। जानकारों का कहना है कि निगम में डीजल घोटाला तब तक जारी रहेगा, जब तक यहां के वाहनों के एवरेज निर्धारित न कर दिए जाएं।
गुरुवार को मामला सामने आने के बाद हर वाहन की चैकिंग शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को मौजूदा डीजल टैंक प्रभारी विजय गोयल खुद दानापानी टैंक पर पहुंचे। यहां उन्होंने 25-30 ऐसे कचरा ट्रांसफर वाहनों को खुद चैक किया, जिनके ढक्कन बंद थे। विजय गोयल का कहना है कि इस तरह से वाहनों की चैकिंग आगे भी की जाती रहेगी।
ऐसे पकड़ी गई हैं डीजल चोरी
1. कुछ वाहनों की टैंक क्षमता बढ़ाई थी, फिर ज्यादा डीजल निकालकर बेच दिया जाता था। 2. सीवेज शाखा के बंद खड़े वाहनों के नंबर के आधार पर डीजल देना भी पकड़ा गया था। 3. एक ही वाहन को दो बार डीजल दिए जाने की गड़बड़ी भी पकड़ी गई थी।
2018 से कागजों में चल रही एवरेज निर्धारण की फाइल
पहली बार निगम के वाहनों का एवरेज निर्धारित करने के लिए अप्रैल 2018 में तत्कालीन निगम कमिश्नर ने निर्देश दिए थे। अक्टूबर 2020 में प्रभारी डीजल टैंक की ओर से भी नोटशीट चली। 9 नवंबर 2020 को कमिश्नर ने प्रशासक की स्वीकृति के बाद संकल्प जारी किया। लेकिन अफसर इस संकल्प का पालन नहीं करवा पा रहे हैं।
हाल ही में शुरू हुआ गाड़ियों में फ्यूल ट्रैकिंग सिस्टम
डीजल टैंक प्रभारी रहे चंचलेश गिरहारे और निगम कमिश्नर फ्रैंक नोबल ए ने मैप आईटी की मदद से निगम के वाहनों के लिए फ्यूल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करवाया था। ड्राइवर क्यूआर कोड की मदद से ही डीजल ले पाते हैं। ये सिस्टम माता मंदिर, दाना पानी, आरिफ नगर, बैरागढ़ और ट्रांसपोर्ट नगर कोकता में लागू है।
मैनिट के एक्सपर्ट तय करें एवरेज
निगम की सैकड़ों फाइलों में एक पत्र ऐसा भी दबा है, जिसमें वाहनों के एवरेज निर्धारण का काम मैनिट के एक्सपर्ट से करवाने की अनुशंसा की गई थी। इसमें लिखा गया था कि एवरेज निर्धारण वाहन के इंजन और कंडीशन देखकर किया जाएगा तो सटीक परिणाम मिल सकते हैं। इसे भी निगम अफसर लागू नहीं करवा पाए हैं।
गुरुवार को पकड़े गए दोनों कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। हम ऐसे किसी भी कर्मचारी को नहीं बख्शेंगे, जो डीजल चोरी में लिप्त होंगे। डीजल-पेट्रोल की खपत की मॉनिटरिंग लगातार की जा रही है।
-हरेंद्र नारायण, कमिश्नर नगर निगम भोपाल