PoK में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन, पुलिस को पीटा:एक की मौत, 100 घायल, राष्ट्रपति जरदारी ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई

Updated on 13-05-2024 11:57 AM

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में बढ़ती महंगाई और बिजली की कीमतों के विरोध में लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन हुए। इस दौरान पुलिस और PoK के राजनीतिक-धार्मिक संगठन अवामी एक्शन कमेटी (AAC) के बीच शनिवार को झड़प हुई। इसमें एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई, जबकि 100 घायल हुए हैं।

जियो न्यूज के मुताबिक, प्रदर्शनों के बीच AAC ने पूरे PoK में बंद की अपील की। इसके बाद स्कूल, ऑफिस, रेस्त्रां, बाजार और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर ताला लटका नजर आया। PoK के मदीना मार्केट में भारी पुलिस बल तैनात रहा। यहां AAC के कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाली। पुलिस ने मुजफ्फराबाद जाने के रास्ते में बैरिकेड लगा दिए।

पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की
इसके बाद इस्लामगढ़ के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। पुलिस ने आरोप लगाया कि विरोधियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें मीरपुर के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) अदनान कुरैशी को सीने में गोली लग गई। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया, बदले में प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की।

PoK में बिगड़ते हालातों के बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोमवार को इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति ने पाक अधिकृत कश्मीर में बने हालातों को सुधारने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं।

PoK में धारा 144 लगी, मोबाइल सेवाएं सस्पेंड
हिंसा के दौरान कई सरकारी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया। तनाव को देखते हुए PoK में धारा 144 लगा दी गई है। PoK की सरकार ने सार्वजनिक जगहों पर इकट्ठा होने, रैली और जुलूस निकालने पर बैन लगाया है।

वहां के कई इलाकों जैसे भिंबेर, बाघ टाउन, मीरपुर में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस बंद कर दी गई हैं। AAC के प्रवक्ता हाफिज हमदानी ने डॉन न्यूज को बताया कि राज्य में हो रही हिंसा से उनका कोई ताल्लुक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे तत्वों को जानबूझकर प्रदर्शनों के बीच में भेजा जा रहा है, जिससे AAC को बदनाम किया जा सके।

PoK के PM बोले- सरकार हिंसा रोकने के लिए बातचीत को तैयार
PoK के प्रधानमंत्री चौधरी अनवार उल-हक ने कहा, "सरकार ने हिंसा पर काबू करने के लिए हर जरूरी कदम उठाया है। हम शांतिपूर्ण तरह से बातचीत के लिए तैयार हैं, इसके लिए हमारे दरवाजे हमेशा खुले हैं। हालांकि, इसे सरकार की कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।"

वहीं वित्त मंत्री अब्दुल मजीद खान ने कहा, "सरकार पहले ही AAC की सभी मांगों को स्वीकार कर चुकी है। हमने एक समझौता भी साइन किया था, जिसमें आटे पर सब्सिडी और बिजली की कीमतों को 2022 के लेवल पर लाने की सहमति बनी थी। लेकिन AAC एग्रीमेंट से मुकर गई।"

वहीं इमरान खान की पार्टी PTI के लीडर उमर अयूब खान ने शहबाज सरकार को हालात काबू में रखने में असमर्थ बताया। PTI ने कहा, "शांतिपूर्ण तरह से प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसा को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसी नीति पाकिस्तान और लोकतंत्र के लिए खतरा है।"

पाकिस्तान में आटे के दाम 800 रुपए किलो
पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता के बीच देश की आर्थिक हालात खराब हो चुकी। यहां महंगाई दर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पाकिस्तान की जनता भुखमरी और बेरोजगारी से परेशान है। देश में रोजमर्रा की जरूरत के सामान की कीमतें आसमान छू रही हैं।

2024 में पाकिस्तान की GDP महज 2.1% की दर से बढ़ने की संभावना है। फिलहाल एक डॉलर की कीमत 277 पाकिस्तानी रुपए के बराबर है। पाकिस्तान में आर्थिक तंगहाली का असर PoK में भी नजर आने लगा है। यहां एक किलो आटा 800 पाकिस्तानी रुपए में मिल रहा है जबकि, पहले ये 230 रुपए हुआ करता था। वहीं एक रोटी की कीमत 25 रुपए पहुंच गई है।

PoK में पिछले महीने भी लोगों ने बढ़ती महंगाई के विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान लोगों ने सड़कों पर उतरकर महंगाई के खिलाफ नारेबाजी की थी। दूसरी तरफ, PoK में खराब स्थिति को लेकर पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने ये बात मानी है कि वहां लगातार मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

पिछले साल जुलाई में IMF ने पाकिस्तान के लिए बेलआउट पैकेज मंजूर कर दिया था। इसके तहत जुलाई 2023 में उन्हें 10 हजार करोड़ का कर्ज, जनवरी 2024 में उन्हें 5.84 हजार करोड़ और अप्रैल में 9.183 हजार का कर्ज दिया गया। अब पाकिस्तान ने एक बार फिर से IMF से कर्ज मांगा है, जिसके लिए उनकी टीम पाकिस्तान पहुंच गई है।

जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है PoK
PoK यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत का वह हिस्सा है जो पाकिस्तान के साथ लगता है। 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान ने कबीलाई विद्रोहियों की मदद से जम्मू-कश्मीर के इस हिस्से पर कब्जा कर लिया था।

भारतीय फौज इस हिस्से को वापस लेने के लिए लड़ रही थी, मगर उसी समय भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) चले गए। UN ने दखल देकर दोनों देशों के बीच युद्धविराम करवा दिया और ‘जो जहां था, वहीं काबिज हो गया।’

उसी समय से दोनों देशों की फौजें इंटरनेशनल सरहद की जगह लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के दोनों तरफ डटी हैं। LoC दोनों मुल्कों के बीच खींची गई 840 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है।



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