सरकारी विभागों को बड़ी राहत देने की तैयारी, लाखों करोड़ रुपये का होगा फायदा, क्या है प्लान?
Updated on
27-06-2025 01:23 PM
नई दिल्ली: केंद्र सरकार जल्द ही एक बड़ा फैसला ले सकती है। सरकार केंद्रीय और राज्य सरकार के विभागों को स्पेक्ट्रम चार्ज के भुगतान में देरी पर लगने वाले जुर्माने और ब्याज में भारी छूट देने की तैयारी में है। इसमें पुलिस, रक्षा और प्रसार भारती जैसे विभाग शामिल हैं। अगर यह फैसला होता है तो इन विभागों को बड़ी राहत मिलेगी। इन विभागों पर लाखों करोड़ों रुपये का बकाया है। सूत्रों की मानें तो कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
प्रस्ताव के अनुसार लगभग 95% ब्याज और जुर्माने को माफ किया जा सकता है। सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। एक अधिकारी ने बताया कि विभागों को अब केवल मूल राशि और उस पर 5% ब्याज देना होगा। बाकी सारा बकाया माफ कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि कैबिनेट ने बुधवार को इस प्रस्ताव पर विचार किया। हालांकि, कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार की प्रेस विज्ञप्ति में इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
सबसे बड़े डिफॉल्टर
सूचना और प्रसारण मंत्रालय, अंतरिक्ष विभाग (DoS) और रेलवे जैसे विभाग सबसे बड़े डिफॉल्टर हैं। इन पर सबसे ज्यादा बकाया है। इन विभागों पर 2004 से बकाया राशि है। हर साल चक्रवृद्धि ब्याज लगने के कारण यह राशि कई गुना बढ़ गई है। यह छूट सिर्फ केंद्रीय और राज्य सरकार के विभागों के लिए है। यह पब्लिक सेक्टर यूनिट (PSU) या प्राइवेट कंपनियों के लिए नहीं है। इन विभागों को दूरसंचार विभाग (DoT) ने स्पेक्ट्रम आवंटित किया था।
इन मंत्रालयों और विभागों को एयरवेव्स का इस्तेमाल करने के लिए कुछ शुल्क देना होता है। अगर वे भुगतान में देरी करते हैं, तो उन पर 24% का जुर्माना लगता है। यह जुर्माना हर साल चक्रवृद्धि ब्याज के साथ बढ़ता रहता है। एक अधिकारी ने बताया कि कई बार विभागों ने मूल राशि तो दे दी, लेकिन देरी से दी। इस वजह से उन पर जुर्माना लगा और यह राशि हर साल बढ़ती गई।
एयरवेव्स का यूज
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत प्रसार भारती और रक्षा विभागों पर सबसे ज्यादा बकाया है। प्रसार भारती अपने प्रसारण कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में स्पेक्ट्रम का उपयोग करता है, जबकि रक्षा विभाग भी स्पेक्ट्रम का बड़ा उपयोगकर्ता है। इसी तरह, DoS अपने सैटेलाइट संचालन के लिए स्पेक्ट्रम का उपयोग करता है और रेलवे को अपने सिग्नल और सुरक्षा कार्यों के लिए प्रीमियम 700 MHz बैंड में स्पेक्ट्रम आवंटित किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि इन विभागों को अलग-अलग बैंड में हजारों MHz एयरवेव्स इस्तेमाल करने के लिए दिए गए हैं। कैबिनेट ने पहले लगभग 1100 MHz स्पेक्ट्रम को रिफॉर्म करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसकी कीमत लगभग 5 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसे आने वाले कुछ साल में नीलाम किया जा सकता है। रिफॉर्मिंग के जरिए, इन विभागों को दी गई फ्रीक्वेंसी को बदला जाएगा या फिर से व्यवस्थित किया जाएगा। जो स्पेक्ट्रम बचेगा, उसे नीलाम कर दिया जाएगा।
इंडस्ट्री की डिमांड
पिछले साल के अंत में सचिवों की एक समिति ने अलग-अलग बैंड में स्पेक्ट्रम को रिफॉर्म करने की मंजूरी दी थी। टेलीकॉम इंडस्ट्री भी 5G और 6G के लिए 3.5 GHz से 6 GHz तक के मिड-बैंड स्पेक्ट्रम की मांग कर रही है। DoT का भी मानना है कि 5G टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने और 6G को शुरू करने के लिए ज्यादा एयरवेव्स की जरूरत है। 6G को 2030 तक लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। रक्षा विभाग और DoS जैसे पुराने उपयोगकर्ता अभी भी इस स्पेक्ट्रम का ज्यादातर हिस्सा इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें दूसरी फ्रीक्वेंसी पर शिफ्ट किया जा सकता है।
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